अनागत का भय
एक संवेदनशील कहानी है जो पति-पत्नी के गहरे प्रेम, बीमारी की पीड़ा और बिछड़ने के मौन भय को हृदयस्पर्शी ढंग से प्रस्तुत करती है।

एक संवेदनशील कहानी है जो पति-पत्नी के गहरे प्रेम, बीमारी की पीड़ा और बिछड़ने के मौन भय को हृदयस्पर्शी ढंग से प्रस्तुत करती है।
हर रोज मैट्रो स्टेशन पर भीख मांगती वह अंधी भिखारन मेरी नजरों के सामने होती।
एक दिन उसकी तबियत ठीक न होने पर मैंने देखा कि उसकी देखभाल एक जवान लड़की कर रही थी। कई सालों के दर्द और असहायता के बावजूद, उस बच्ची ने उसकी सेवा को अपना स्वाभिमान बना लिया। भीख मांगना नहीं, बल्कि सहयोग और मानवता की यही असली पहचान है।