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सब्र और त्याग से भरी भारतीय स्त्री का भावपूर्ण चित्र

सब्र…

बेटी से लेकर सास तक, एक स्त्री हर रिश्ते को अपना मानकर निभाती रहती है, फिर भी कई बार हर पड़ाव पर उसे पराया ही समझ लिया जाता है. यह कविता उसी स्त्री के सब्र, त्याग और अनकहे दर्द की कहानी है

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सपनों की कोई सरहद नहीं…

बिहार के छोटे से शहर से निकलकर देश-विदेश में अपनी साहित्यिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों से पहचान बनाने वाली रंजीता सिंह फ़लक आज महिलाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं। स्वयंसिद्धा संस्था के माध्यम से वह महिलाओं को सशक्त बनाने का कार्य कर रही हैं, वहीं कविकुंभ पत्रिका और अपने चर्चित काव्य संग्रहों के जरिए साहित्य जगत में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कर चुकी हैं।

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