gulmohar
घर के आँगन में अकेला बैठा वृद्ध पिता, हाथ में बेटी की पुरानी तस्वीर, चेहरे पर दर्द और आँखों में नमी, पृष्ठभूमि में खाली दरवाज़ा और सांझ का धुंधलका।

भागी हुई बेटी का पिता

एक बेटी के घर छोड़ जाने के बाद पिता के मन में उठने वाले अपराधबोध, गुस्से, सामाजिक अपमान और अंततः प्रेम की स्वीकृति का बेहद मार्मिक चित्रण। यह कविता केवल एक पिता की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय समाज की जटिल मानसिकता और रिश्तों की गहरी पड़ताल है।

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