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प्रेम के अवसर

गोविंद शारीरिक अक्षमता और आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, जबकि विद्या परिवार की जिम्मेदारियाँ निभा रही है। एक दिन गोविंद को एहसास होता है कि उसने अपनी पत्नी को प्रेम करने के कितने ही अवसर खो दिए हैं। यह कहानी प्रेम, आत्मसम्मान और वैवाहिक रिश्तों की गहरी संवेदनाओं को सामने लाती है।

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अधूरी बात, अधूरा जीवन…

शारीरिक बीमारियों का इलाज तो हम कर लेते हैं लेकिन वह बीमारियां जो दिमाग के अंदर ही अंदर पनपतीं रहती हैं, किसी को दिखाई नहीं देती है, सही समय पर उनको पहचान कर, स्वीकार करना और इलाज ना किया जाए तो उनका रूप किस कदर बिगड़ेगा …..
विवेक की मानसिक स्थिति दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही थी ।‌ मां को लेकर वह असुरक्षित महसूस करता था । अपनी बात ना मां को ना किसी और को समझा पाया ।
मां उसकी इस बीमारी को समझ तो रही थी लेकिन इससे पहले कि वह इलाज ढूंढती …..

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