gulmohar
एक पर्यावरणविद् मंच पर भाषण देते हुए, पीछे लक्ज़री कार का दृश्य

वे बेचारे……

यह व्यंग्यात्मक लेख आधुनिक समाज में बढ़ते दिखावटी पर्यावरणवाद और नैतिक पाखंड पर तीखा प्रहार करता है। कहानी एक ऐसे गुरुजी से शुरू होती है, जो गांव की पाठशाला में बच्चों को पर्यावरण संरक्षण और सादगी का पाठ पढ़ाते हैं। उनके आदर्श, उनके विचार और उनका जीवन सब कुछ इतना प्रभावशाली होता है कि लोग उन्हें भगवान जैसा मानने लगते हैं।

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