मुन्ना से कीर्ति राणा
भास्कर इंदौर की सिटी डेस्क की जिम्मेदारी मिलने से लेकर नई काइनेटिक होंडा और सांप्रदायिक तनाव के बीच रिपोर्टिंग तक, यह संस्मरण पत्रकारिता के उन दिनों की यादें समेटता है, जब हर खबर के साथ जोखिम और जिम्मेदारी जुड़ी होती थी।

भास्कर इंदौर की सिटी डेस्क की जिम्मेदारी मिलने से लेकर नई काइनेटिक होंडा और सांप्रदायिक तनाव के बीच रिपोर्टिंग तक, यह संस्मरण पत्रकारिता के उन दिनों की यादें समेटता है, जब हर खबर के साथ जोखिम और जिम्मेदारी जुड़ी होती थी।
पत्रकारिता के शुरुआती दिनों में क्रीम-काले रंग की लूना सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि जिंदगी की साथी थी। नईदुनिया में प्रशिक्षु पत्रकार के पद के लिए इंटरव्यू देने के बाद भास्कर से लूना जमा कराने का नोटिस मिला। इसके बाद शुरू हुआ नौकरी, संघर्ष और नई जिम्मेदारियों का ऐसा सफर, जिसमें लूना से लेकर सेकंडहैंड चेतक तक कई यादें जुड़ गईं।