gulmohar
निशिगंधा के फूल, मिट्टी के जलते दीये और चाँदनी रात में नदी किनारे ध्यानमग्न स्त्री

दिल को छूती मौन की गूँज…

“निशिगंधा की महक से जग उठा संसार, आंखों में बह रही गंगा और यमुना की धाराएँ। मिट्टी के दीपों की रौशनी में प्रार्थना और शांति पंचतत्व में विलीन हो रही हैं, और एक गीत हर दिल को छूते हुए गूँज रहा है।”

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