मुन्ना से कीर्ति राणा
दैनिक भास्कर में बिताए वर्षों की कुछ यादें ऐसी हैं, जो एक संपादक के व्यक्तित्व के कई पहलुओं को सामने लाती हैं। श्रवण गर्ग के साथ खबरों पर तीखी बहस, रिपोर्टर की बेबाकी, कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता और नाग-कोबरा वाला वह मजेदार प्रसंग न्यूज़रूम की एक अलग ही तस्वीर पेश करता है।
