प्रेम के अवसर
गोविंद शारीरिक अक्षमता और आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, जबकि विद्या परिवार की जिम्मेदारियाँ निभा रही है। एक दिन गोविंद को एहसास होता है कि उसने अपनी पत्नी को प्रेम करने के कितने ही अवसर खो दिए हैं। यह कहानी प्रेम, आत्मसम्मान और वैवाहिक रिश्तों की गहरी संवेदनाओं को सामने लाती है।
