gulmohar
पूर्णिमा की शांत रात में भारतीय शहर की एक संकरी गली, सामने खेतों के ऊपर उगता सुनहरी रोशनी से दमकता चाँद, धुंध में नहाया स्ट्रीट लाइट और हल्की एम्बर रोशनी में चमकते घर; माहौल में सादगी, स्मृति और अपनापन झलकता है।

पून्नो का चाँद

यह रचना पूर्णिमा की रात के एक दुर्लभ दृश्य को माँ की लोकबोली से जोड़ती है। चाँद सिर्फ आकाशीय पिंड नहीं रह जाता, बल्कि स्मृतियों, रिश्तों और भाषा के स्नेहिल स्पर्श में बदल जाता है—जहाँ “पूर्णिमा” माँ के लिए “पुन्नो” बन जाती है।

Read More
सावन में प्रियतम की प्रतीक्षा करती प्रेमिका का भावपूर्ण दृश्य

विरह

निशा की नीरवता में बैठी नायिका प्रतीक्षा में लिपटी है .हवा में भीगी चाँदनी, शरीर पर ओस की बूँदें जैसे भावना का स्पर्श कर रही हों। वह प्रिय के आगमन की राह में सजी-संवरी है, मानो सावन स्वयं प्रेम का संदेश लेकर आया हो। मन में उमड़ती आशाओं से मोतियों का हार पिरोती, पलकें प्रतीक्षा की लाली से भीग उठी हैं।

Read More

उस शाम…

उस शाम का मौन बहुत कुछ कह गया। आपके कहने का इंतज़ार नहीं था मुझे, क्योंकि आपकी नज़रें और आपकी ख़ामोशी ही मेरे दिल तक उतर आई थीं। वह अहसास किसी अनदेखी धारा की तरह मेरे हृदय को छूता चला गया। आसमान पर टिमटिमाते तारे हमारे साक्षी बने और हरसिंगार की महक ने आपके मन की अनकही बात मुझ तक पहुँचा दी। हम आमने-सामने थे, और ऐसा लगा जैसे हमारे दिलों के द्वार सदियों से एक-दूसरे की प्रतीक्षा कर रहे हों। दूर तक फैली चाँदनी ने हमें घेर लिया और हरसिंगार की माला ने हमारी आत्माओं को एक सूत्र में बाँध दिया। उस पल न समय का कोई बंधन था, न दूरी की कोई दीवार—बस आप थे, मैं थी और हमारा गहरा, मौन प्रेम।

Read More