gulmohar
कथक नृत्यांगना के पैरों में बँधे घुँघरू

घुँघरू

घुँघरुओं की झंकार केवल नृत्य का संगीत नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति, विरह और मन के अनगिनत भावों की अभिव्यक्ति भी है। प्रस्तुत कविता में घुँघरुओं की इसी भावपूर्ण दुनिया को शब्दों में पिरोया गया है।

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