gulmohar

बड़की

संयुक्त परिवार की रसोई सिर्फ़ खाना पकाने की जगह नहीं होती, वहाँ रिश्तों की आँच भी सुलगती है।
सुनीता को आज समझ आया कि कमाना ही पर्याप्त नहीं, घर के कामों में हाथ बँटाना भी उतना ही ज़रूरी है। बड़ी भाभी ललिता की चुप्पी में शिकायत नहीं, थकान छिपी थी उस जिम्मेदारी की जो उन्होंने बरसों से बिना शोर उठाई थी। कभी-कभी रिश्तों में तकरार इसलिए नहीं होती कि कोई गलत है, बल्कि इसलिए कि कोई दूसरे की थकान देख नहीं पाता।

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