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बसंत ऋतु में खिले फूलों, कोयल और भँवरे के बीच प्रकृति सौंदर्य निहारती भारतीय ग्रामीण स्त्री

ऋतु बसंत आयो री…

“ऋतु बसंत आयो री” प्रकृति के नवजीवन, प्रेम और उल्लास का काव्यात्मक उत्सव है। शीतल बयार, खिले सुमन, कोयल की कूक और मन के हिलोर के माध्यम से यह कविता बसंत ऋतु की जीवंत अनुभूति कराती है।

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