gulmohar

एक पाती मुसाफ़िर के नाम…

जाने से पहले की वह आख़िरी मुलाक़ात जहाँ मौसम, सड़कें, पेड़ और खामोशी तक हमारी बातों के साक्षी बने। मीठी यादों, अनकहे जज़्बातों और एक गलतफ़हमी के बीच खड़ी चुप्पी की दीवार, जो आज भी लौटने से रोकती है।

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