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अच्छी औरत: समाज की सोच, घरेलू हिंसा और एक स्त्री की अनकही कहानी

अच्छी औरत

एक नई दुल्हन, जो कभी घूँघट में सिमटी रहती थी, घरेलू हिंसा, अपमान और जीवन की क्रूर परिस्थितियों से गुजरते-गुजरते ऐसी दुनिया में पहुँच जाती है जहाँ समाज उसे “अच्छी औरत” मानने से इनकार कर देता है। यह मार्मिक कविता केवल एक स्त्री की कहानी नहीं, बल्कि उन सामाजिक मानदंडों पर सवाल है जो परिस्थितियों को नहीं, केवल परिणामों को देखते हैं।

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