.. अंतर्मन जागा और शरद अरोरा ने छोड़ दिया मांसाहार!
महिदपुर रोड में चातुर्मास और धार्मिक गतिविधियों के बीच शरद अरोरा ने मांसाहार त्यागकर शाकाहार और जीवदया अपनाने का संकल्प लिया. उनका यह निर्णय अहिंसा, करुणा और आत्मपरिवर्तन का प्रेरक संदेश देता है.

महिदपुर रोड में चातुर्मास और धार्मिक गतिविधियों के बीच शरद अरोरा ने मांसाहार त्यागकर शाकाहार और जीवदया अपनाने का संकल्प लिया. उनका यह निर्णय अहिंसा, करुणा और आत्मपरिवर्तन का प्रेरक संदेश देता है.
महिदपुर रोड में स्व. सुरेश चंद्र चत्तर की पुण्यतिथि पर आयोजित गौसेवा कार्यक्रम ने समाज में सेवा, संवेदनशीलता और जीवदया का प्रेरक संदेश दिया।
यह कविता “चिड़िया प्यासी है” जल संरक्षण और जीवदया का मार्मिक संदेश देती है। बदलते पर्यावरण और घटती चिड़ियों की संख्या के बीच यह रचना हमें याद दिलाती है कि पक्षियों के लिए पानी रखना भी एक बड़ी सेवा है।
“सेवा का भाव मेरे लिए कोई काम नहीं, जीवन का उद्देश्य है।”ये शब्द उस संवेदनशील समाजसेवी के हैं जिन्होंने कोरोना काल से लेकर आज तक मूक पशुओं, पक्षियों, जरूरतमंदों और असहायों के लिए अथक सेवा की है। चाहे पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था हो, गौशाला में चारे की सेवा या फिर बेड रिडन मरीजों के लिए निःशुल्क उपकरण हर कार्य में करुणा, प्रतिबद्धता और पारिवारिक संस्कारों की झलक मिलती है।