जब तुम आओ…
जब कोई मिलने आए, तो वह अधूरा नहीं, पूरा होकर आए—यही इस कविता का मूल भाव है। यह रचना बताती है कि आधे मन और बंटी हुई भावनाओं के साथ सच्चा समर्पण संभव नहीं होता। प्रेम तभी पूर्ण होता है, जब उसमें किसी प्रकार की कमी या विभाजन न हो।

जब कोई मिलने आए, तो वह अधूरा नहीं, पूरा होकर आए—यही इस कविता का मूल भाव है। यह रचना बताती है कि आधे मन और बंटी हुई भावनाओं के साथ सच्चा समर्पण संभव नहीं होता। प्रेम तभी पूर्ण होता है, जब उसमें किसी प्रकार की कमी या विभाजन न हो।
“नया मन” केवल एक कविता नहीं, बल्कि जड़ हो चुके विचारों, पूर्वाग्रहों और दूषित सामाजिक यथार्थ के विरुद्ध एक संवेदनशील पुकार है। यह रचना ऐसे नए मन, नए विचार और नई चेतना की कल्पना करती है, जो निष्कलुष, मानवीय और सत्यनिष्ठ हो। कविता पाठक को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है और एक बेहतर समाज की संभावना को स्वर देती है।
“प्रकृति स्वयं कहती है—मैं ही इस धरती की शोभा हूँ, जीवन का मूल आधार हूँ। मेरी कोमल शाखाएँ, मेरी छाया, मेरे फूल-पत्ते सभी जीवों के लिए आश्रय और सहारा हैं। जब कोई निराश होता है, मैं उसे आशा देती हूँ; जब कोई भूखा-प्यासा होता है, मैं उसकी भूख-प्यास मिटाती हूँ।
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में पुरुषोत्तम अग्रवाल की पुस्तक ‘मजबूती का नाम महात्मा गांधी’ का लोकार्पण हुआ। अशोक वाजपेयी ने इसे गांधी-निंदा अभियानों को चुनौती बताया, वहीं राजमोहन गांधी ने देश में फैलाए जा रहे झूठों पर चिंता जताई।
“पराया धन” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि वह सामाजिक सोच है जो बेटियों को अपने ही घर में अस्थायी महसूस कराती है। यह लेख स्त्री की स्वतंत्र चेतना, आत्मसम्मान और भावनात्मक सबलता की आवश्यकता पर गंभीर प्रश्न उठाता है और समाज से आग्रह करता है कि बेटियों को संपत्ति नहीं, स्वतंत्र व्यक्तित्व की तरह देखना सीखे।
दूसरों के बनाए रास्तों पर चलने के बजाय अपनी मंज़िल खुद तलाशने का संदेश देती यह प्रेरक हिंदी कविता आत्मविश्वास, संघर्ष और हौसले की ताकत को खूबसूरती से व्यक्त करती है।
नारी केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र के निर्माण में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्राचीन काल से ही सीता, गार्गी, सावित्री और अपाला जैसी नारियों ने अपनी बुद्धिमत्ता और साहस से समाज को नई दिशा दी। मध्यकाल में रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई होल्कर और बेगम हजरत महल जैसी वीरांगनाओं ने अपने साहस से यह सिद्ध किया कि नारी किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं।
आधुनिक युग में भी नारी ने हर क्षेत्र—विज्ञान, राजनीति, कला, खेल और व्यापार—में सफलता के झंडे गाड़े हैं। कल्पना चावला, किरण बेदी, सुनीता विलियम्स और मैरी कॉम जैसी प्रेरणादायी महिलाएँ इसका प्रमाण हैं।
“पल-पल जीवन” कविता जीवन के निरंतर बहाव, संघर्ष और सौंदर्य को दर्शाती है। इसमें प्रकृति के माध्यम से जीवन के विभिन्न रूपों खुशी, विवशता, आशा और संघर्ष का चित्रण किया गया है। यह कविता हमें सिखाती है कि हर कठिन समय के बाद भी जीवन आगे बढ़ता रहता है और नई उम्मीदें जन्म लेती हैं।
पुणे के गणेशोत्सव को और भी यादगार बनाते हुए ढोले पाटील शैक्षणिक संस्था ने एक नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है. संस्था के अध्यक्ष सागर उल्हास ढोले पाटिल के नेतृत्व में, सर्वाधिक नागरिकों ने एक साथ दीप जलाकर आरती की और नया विश्वविक्रम स्थापित किया. खास बात यह रही कि आरती करने वाली सभी महिलाएं थीं
इस आयोजन ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित सरयू आरती समिति का वह पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया जिसमें दिवाली पर सबसे अधिक लोगों ने एक साथ दीपों से आरती की थी
गुलमोहर की खामोश निगाहें और रजनीगंधा की अनकही खुशबू—दो ऐसे एहसास, जिनके बीच प्रेम कभी शब्द नहीं बनता, फिर भी सब कुछ कह जाता है।