Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

कृष्ण तुम ही हो…

कवि कृष्ण को सबमें और सब कुछ कृष्ण में देखता है। वे ज्ञान भी हैं और विज्ञान भी, वेद भी हैं और उपदेश भी। प्रकृति में बहती सरिता से लेकर सागर की गहराइयों तक, पेड़-पौधों की हरियाली से लेकर धरती की मुस्कान तक हर रूप में कृष्ण विराजते हैं। वे काल भी हैं और भाव भी, प्रेम की ज्वाला भी और विरह की पीड़ा भी। कभी मरहम बनकर सहलाते हैं तो कभी प्रेरणा बनकर दिशा दिखाते हैं। भजन-किर्तन में गूंजते स्वर हों या संसार की माया सब कृष्ण ही हैं, तारणहार भी वही।

Read More

माँ का रसोईघर

माँ चूल्हे की आँच में तपकर जीवन को महकाती है। आटे की लोई में वह अपने सपनों को गूँथती और बेलती है। दिनभर की थकान उसके चेहरे से तब गायब हो जाती है जब थाली में पकवानों की खुशबू फैलती है और परिवार का हर सदस्य संतोष से भोजन करता है। बच्चों की चमकती आँखों में उसे अपनी सबसे बड़ी तृप्ति मिलती है।

उसके लिए खाना सिर्फ शरीर का ईंधन नहीं है, बल्कि घर का प्रेम है, जिससे परिवार जीवित और आनंदित रहता है। उसकी रसोई एक तपोवन है, जहाँ वह हर दिन निस्वार्थ भाव से यज्ञ करती है

Read More
रात में बालकनी में बैठा एक व्यक्ति हाथ में चाय लिए किसी प्रिय स्त्री को याद करते हुए भावुक भाव में शहर की रोशनियों को देख रहा है।

बालकनी की उस रात में तुम…

रात की खामोशी, अधूरी चाय और बालकनी में बैठा एक व्यक्ति जो एक ऐसी स्त्री को याद कर रहा है, जिसने उसे सिखाया कि सपनों को जिम्मेदारियों के बीच भी जिंदा रखा जा सकता है।

Read More

हिन्दी से है मेरी पहचान

यह कविता हिंदी भाषा के प्रति प्रेम और गर्व को उजागर करती है। हिंदी केवल हमारी मातृभाषा ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, ज्ञान और संस्कारों का प्रतीक भी है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि हिंदी हमारे जीवन, साहित्य और राष्ट्र की आत्मा का अभिन्न हिस्सा है।

Read More

खरगोश-सा नाज़ुक दिल

एक स्त्री थी, जिसका दिल खरगोश-सा नाज़ुक था। वह चाहती थी कि जीवन हँसी और प्रेम की बारिश से भीगे, पर उसकी भावनाओं को कभी महत्वपूर्ण नहीं समझा गया। ओस से भीगी घास को छूकर मुस्कराने की उसकी चाहत, दूसरों की कठोरता में दबकर रह गई। स्थूल प्रेम की निरंतर चोटों ने उसे भीतर से घायल कर दिया।

फिर एक दिन पछुआ हवा चली, बादल घिर आए और घनघोर वर्षा होने लगी। उस वर्षा में भीगते हुए उसने पहली बार अपने भीतर-बाहर बादलों का स्पर्श महसूस किया। हवा की अनंत यात्रा आकर उसकी छाती पर ठहर गई, और उसके भीतर का नाज़ुक दिल धड़कता रहा। जीवन के बेस्वाद गिलास में अचानक प्रेम का रंग घुलने लगा।

Read More
हरी-भरी प्रकृति, बहती नदी, पर्वत और आकाश के साथ सृष्टि की सुंदरता को दर्शाता यथार्थवादी दृश्य

सृष्टि का संगीत

“प्रकृति की अद्भुत कृति” एक सुंदर हिंदी कविता है, जो सृष्टि की रचना, प्रकृति की सुंदरता और ईश्वर की अद्भुत कारीगरी का भावपूर्ण वर्णन करती है। इस कविता में धरती, आकाश, सूर्य, चंद्रमा, नदियाँ और हरियाली के माध्यम से जीवन के संतुलन और समानता का संदेश दिया गया है। साथ ही यह रचना आध्यात्मिकता, मानवता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को दर्शाती है। प्रकृति प्रेमियों और साहित्य पाठकों के लिए यह एक प्रेरणादायक कविता है।

Read More

छप्पन भोग और खाटू श्याम दरबार ने बांधा श्रद्धालुओं का मन

श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस का आयोजन आज अत्यंत भक्तिमय, उल्लासपूर्ण और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कथा स्थल श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति से गुंजायमान रहा। हर ओर “श्रीकृष्ण” नाम का संकीर्तन, भक्ति गीतों की मधुर ध्वनि और श्रद्धा की तरंगें वातावरण को पावन बना रही थीं।

Read More

पहली बार

सूरज ढलने ही वाला था, अँधेरा पूरी तरह उतरा नहीं था और बच्चे अभी खेलकर घर नहीं लौटे थे। तभी किसी ने धीरे से पुकारा — “दुन्नो।” इस पुकार ने उसके भीतर कुछ कोमल और अनजाना जगाया। कान के पीछे हल्की सिहरन दौड़ गई। चूल्हे पर दाल उबल रही थी, लकड़ियाँ सुलगानी थीं और रोटियाँ बनानी थीं। उसके विचारों की दुनिया अब तक रोटियों तक सीमित थी, जिन्हें उसे जीवन भर बेलना था।

दुन्नो ने अभिनय किया जैसे उसने कुछ सुना ही न हो। यही उसे सिखाया गया था — अच्छी लड़कियाँ आवाज़ की दिशा में नहीं देखतीं, कुँवारी लड़कियाँ मोम की बनी होती हैं, जिन्हें आँच से बचाकर रखना ही उनका कर्तव्य है। लेकिन वह पुकार फिर आई, इस बार स्वर में मिठास थी। हाथ में लोई थामे उसने पूछ लिया — “कौन हो तुम? जो पुकारता है मुझे, जबकि मैं खुद अपना नाम भूल चुकी हूँ। तुमने मुझे जीवित पुकारा, तो क्या मैं सच में ज़िंदा हूँ?”

Read More
अपनी बिटिया को स्नेह से गोद में लिए एक भारतीय माँ का भावपूर्ण दृश्य

बिटिया

“बिटिया” एक भावपूर्ण कविता है जो बेटी के जन्म से लेकर उसके प्रेम, विश्वास और जीवन में उसके अमूल्य स्थान को शब्द देती है। यह रचना बेटियों को ईश्वर का अनुपम उपहार मानते हुए उनके प्रति सम्मान, स्नेह और गर्व की भावना व्यक्त करती है।

Read More

इंदौर प्रेस क्लब का चुनाव कल

देश में कभी अपनी विशिष्ठ पहचान रखने वाले इंदौर प्रेस क्लब के हर तीन वर्ष में होने वाले चुनाव करीब छह साल बाद हो रहे हैं । मतदान 14 सितंबर रविवार को होना है। क्लब के विधान मुताबिक कोई भी सदस्य प्रमुख पद के लिये दो बार चुनाव लड़ सकता है, वर्तमान अध्यक्ष अरविंद तिवारी की तरह पूर्व अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल भी दो बार चुनाव लड़ चुके हैं, इसलिये दोनों चुनावी रेस से बाहर हो गए हैं। महत्वपूर्ण यह कि पद पर रहे ये दोनों ही अध्यक्ष आरोपों के भी शिकार हुए हैं और बात कोर्ट तक भी पहुंची है।

Read More