उज्जैन में सिंहस्थ मेले की तैयारियों के तहत बनाए जा रहे पार्किंग स्थल का दृश्य, जहां बड़ी संख्या में वाहनों के लिए व्यवस्थित जगह चिन्हित की गई है और अधिकारी निरीक्षण करते नजर आ रहे हैं.

सिंहस्थ में पार्किंग व्यवस्था पर प्रशासन का फोकस

सिंहस्थ मेले की तैयारियों में प्रशासन ने पार्किंग व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए नए स्थल चिन्हित किए हैं. मक्सी रोड की पार्किंग को धतरावदा शिफ्ट करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को घाट तक कम दूरी तय करनी पड़े.

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गोगापुर गौशाला में गायों को चारा खिलाते हुए श्रद्धालु, पुण्यतिथि पर आयोजित गौसेवा कार्यक्रम का दृश्य

पुण्यतिथि पर गौसेवा: युवाओं ने पेश की मिसाल

महिदपुर रोड में स्व. सुरेश चंद्र चत्तर की पुण्यतिथि पर आयोजित गौसेवा कार्यक्रम ने समाज में सेवा, संवेदनशीलता और जीवदया का प्रेरक संदेश दिया।

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सोना-चांदी ने बनाया नया इतिहास

सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज यानी 29 दिसंबर को लगातार पांचवें कारोबारी दिन दोनों कीमती धातुएं अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत 205 रुपये की बढ़त के साथ 1,38,161 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई, जो अब तक का उच्चतम स्तर है। इससे पहले सोने का भाव 1,37,956 रुपये प्रति 10 ग्राम था।

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साहित्य संकल्प राँची इकाई की प्रथम ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में शामिल कवि और साहित्यकार

राँची में सजा शब्दों का महाकुंभ

साहित्य संकल्प, राँची इकाई द्वारा प्रथम ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार अवसर साबित हुआ, जिसमें देशभर के रचनाकारों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।
गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. उर्मिला सिन्हा ने की। कार्यक्रम का संयोजन, संचालन एवं स्वागत उद्बोधन अर्पणा सिंह ‘अर्पी’ ने कुशलतापूर्वक किया।

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“1990 के दशक का भारतीय घर जिसमें टेपरिकार्डर, कैसेट और मटके पर रखा स्पीकर देसी जुगाड़ साउंड सिस्टम के रूप में इस्तेमाल हो रहा है”

बेबी को बेस पसंद है

स सिर्फ़ आवाज़ नहीं होता, वह एक जुनून होता है। टेपरिकार्डर, कैसेट और जुगाड़ से पैदा हुआ वह गूंजता बेस, जो साधारण मशीन को भी महफिल बना देता था। मटके पर उल्टा रखा स्पीकर सिर्फ़ प्रयोग नहीं था, वह उस दौर की रचनात्मक ज़िद थी जहाँ साधन कम थे, पर शौक़ और शरारत दोनों भरपूर थे। और हाँ, घर से थोड़ी दूर रहने वाली ‘बेबी’ को भी वही बेस पसंद था।

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होली के अवसर पर रंगों से खेलते लोग, गुलाल और अबीर उड़ाते हुए, आत्मीयता और प्रेम का दृश्य

होली : आत्मीयता का पर्व

होली भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख रंगोत्सव है, जो फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। होलिका-दहन असत्य और अहंकार के अंत का संदेश देता है, जबकि रंगों की होली आपसी आत्मीयता को मजबूत करती है। यह पर्व हमें जीवन के विविध रंगों को स्वीकार कर प्रेम और सद्भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

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माँ का आँचल कविता माँ के प्रेम और ममता पर आधारित हिंदी रचना

माँ का आँचल

“माँ का आँचल” एक भावनात्मक कविता है जो माँ के प्रेम, ममता और त्याग को सरल और सुंदर शब्दों में व्यक्त करती है। यह कविता हर पाठक को अपनी माँ की याद दिलाती है

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युवा पीड़ा, सामाजिक निराशा और भीतर के शोर को दर्शाती भावनात्मक हिंदी कविता का दृश्य

पंगु

‘पंगु’ केवल एक कविता नहीं, बल्कि भीतर दबे शोर, सामाजिक विडंबना, युवा असंतोष और व्यवस्था पर तीखा प्रश्न है। इसमें बेरोजगारी, टूटते सपने, स्त्री असुरक्षा और राजनीतिक वादों के बीच जूझती पीढ़ी की बेचैनी मुखर होकर सामने आती है।

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रीता मिश्रा तिवारी परिचय

रीता मिश्रा तिवारी : शब्दों की साधिका

रीता मिश्रा तिवारी हिंदी साहित्य की सशक्त रचनाकार हैं, जिन्होंने कविता, कहानी और लघुकथा के माध्यम से समाज को नई संवेदना और चेतना दी है।

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टूटे शीशों के बीच खिलता लालबाग

स्नातकोत्तर अध्ययन के दौरान दक्षिण भारत की 21 दिनों की यात्रा लेखक के लिए केवल भ्रमण नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और मानवीय व्यवहार को समझने का गहन अनुभव बनी। बंगलौर में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक अनजान व्यक्ति की निस्वार्थ मदद और लालबाग की शांति इस यात्रा को जीवनभर स्मरणीय बना गई।

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