gulmohar

खाली हाथ

वीडियो कॉल पर चार बेटियों को देखकर भावुक होते भारतीय पिता तकनीक दूरियाँ मिटा सकती है, लेकिन अपनों से मिलने की चाहत नहीं।

शोभा रानी गोयल

आज रविवार है। छुट्टी है। घर के सभी काम निबटाकर सुस्ताने बैठी थी। मेरे मन में विचार उमड़ा कि बहुत दिन हुए, सबसे बात किए हुए। हाल-चाल तो व्हाट्सऐप पर पता चल ही जाते हैं, फिर भी मन की बात मन में ही रह जाती है।

क्यों न मैं किसी को फोन कर लूँ? लेकिन फोन पर तो किसी एक से ही बात हो सकती है। त्योहारों का मौसम है, हो सकता है कि सभी किसी काम में व्यस्त हों।

सोचते-सोचते व्हाट्सऐप खोला तो फैमिली ग्रुप दिखाई दिया। उँगलियों ने हरकत की और वीडियो कॉल लगा दिया। जो भी खाली होगा, वह अपनी हाज़िरी दे देगा।

एक-एक करके चारों बहनें जुड़ गईं। एक-दूसरे को देखकर होठों पर मुस्कान तैर गई। बचपन की शरारतें, बीती बातें, छोटी-मोटी लड़ाइयाँ, नोक-झोंक और एक-दूसरे के छिपे राज़ साझा करते चले गए। ऐसा लगा मानो बचपन लौट आया हो और हम सब फिर से छोटी बच्चियाँ बनकर आँगन में एक-दूसरे के साथ खेल रही हों।

हम सबकी आँखें नम थीं। चारों बहनें कब एक साथ जमा होती हैं? शायद किसी पारिवारिक उत्सव में या गर्मियों में। उसमें भी कभी दूरी, कभी कोई ज़रूरी काम, बच्चों की परीक्षाएँ या खुद को ऑफिस से छुट्टी न मिलना—ढेरों बहाने होते हैं।

आज टेक्नोलॉजी ने स्क्रीन पर एक-दूसरे को सामने लाकर भले ही दूरी मिटा दी, पर मन की टीस न मिटा सकी।

एक घंटे बात करने के बाद सब हाथ हिलाकर विदा लेने लगीं। जैसे ही उँगली ने लाल बटन की ओर रुख किया, पाँचवीं कनेक्टेड कॉल पर पापा अपने आँसू पोंछते हुए नज़र आए।

जन्मदाता भी अपने बच्चों को एक साथ देखने के लिए कितने बेचैन होते होंगे! उनके हाथ भी ऐसे ही खाली रह जाते हैं और मन भी। उनके आँसुओं ने उनके मन का सारा हाल कह-सुना दिया।

लेखिका के बारे में


शोभा रानी गोयल
शोभा रानी गोयल हिंदी साहित्य की संवेदनशील रचनाकार हैं। वर्तमान में वे शासन सचिवालय में अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। लघुकथा, कहानी, कविता और आलेख विधाओं में सक्रिय उनकी रचनाएँ देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा वे सम्मानित एवं पुरस्कृत हैं तथा पत्रिका टीवी, एफ.एम. रेडियो, आकाशवाणी और राजस्थान दूरदर्शन पर सहभागिता कर चुकी हैं। उनके प्रकाशित साहित्य में नेविगेटर (राजस्थान साहित्य अकादमी से अनुदानित कहानी संग्रह), एकांकिता (काव्य संग्रह) और उपांतसाक्षी (कहानी संग्रह) शामिल हैं। उनकी रचनाएँ बीस से अधिक साझा संकलनों में भी प्रकाशित हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *