
अनुपमा भार्गव
प्रेम केवल किसी रिश्ते या व्यक्ति से जुड़ा भाव नहीं, बल्कि मानव जीवन की सबसे गहरी संवेदनाओं में से एक है। यह कविता प्रेम को करुणा, उम्मीद, त्याग, समर्पण और मानवीय संवेदना के रूप में देखती है। कविता की पंक्तियां बताती हैं कि प्रेम का कोई निश्चित रूप या सीमा नहीं होती। वह कभी मुस्कान में दिखाई देता है, कभी आंखों में उम्मीद बनकर उगता है और कभी आंसू बनकर छलक पड़ता है। अंततः प्रेम को ही जीवन का सार और दुनिया को सुंदर बनाए रखने वाली शक्ति माना गया है।
प्रेम दुनिया का
सबसे खूबसूरत अहसास है
सारी भावनाओं में
ये ही सबसे खास है
प्रेम का अपना कोई
रूप रंग नहीं
ये तो बस मुस्कुराते
चेहरे पर दिखता है
करुणा बनकर ह्रदय में
अजस्त्र स्रोत बनकर बहता है
उम्मीद भरी आंखों में उगता है
तो कभी आंसू बनकर
छलक जाता है
जाने कब दिल में समा जाता है
ये तो रूप बदल बदल आता है
प्रेम की कोई सीमा
कोई रूपरेखा नहीं
ये तो अनंत में विचरता है
असंभव है इसकी व्याख्या
सारा शब्दकोश भी
कम पड़ता है
जब तक मन में प्रेम नहीं
ये जीवन बेकार है
प्रेम बस प्रेम ही तो
मानव जीवन का सार है
प्रेम इंसान की मूल प्रवृत्ति है
दुनिया को बचाए रखने की
बस प्रेम में ही शक्ति है
गुजरते वक्त के साथ
प्रेम याद बन जाता है
मीठी याद बनकर
प्रेम जीने का सहारा
बन जाता है
प्रेम को इंसान तो क्या
पशु पक्षी भी पहचानते हैं
प्रेम से पुकारने पर
स्वयं ईश्वर भी दौड़े चले आते हैं
प्रेम शब्दों का मोहताज नहीं
वो तो आंखों से छलकता है
ह्रदय को स्पंदित कर
मन को पावन करता है
आज सारा संसार जब
भावना शून्य हो रहा
प्रेम की भावना जगाना
जरूरी हो रहा
हर संबंध निबाहने की
पहली शर्त प्रेम है
यदि प्रेम नहीं तो कुछ नहीं
ये बात यदि सब जान लें
त्याग , समर्पण का महत्व
पहचान लें तो ये दुनिया
स्वर्ग से भी सुंदर बन जायेगी
जी सकेंगे सभी चैन से
सुख शांति छा जाएगी
प्रेम असीम है
इसकी व्याख्या असंभव है
महसूसो इसे और
बांटों सभी में
यही जीवन का सार है
यही जीवन दर्शन है
इन रचनाओं को भी पढ़ें-
प्रेम: जीवन का सबसे खूबसूरत अहसास
साथ हो तुम मेरे: जब अधूरा प्रेम ही जिंदगी का सहारा बन गया
जैसा मैंने सोचा था…
“मुर्दों की हुई सभा”
मंत्री आईं तो बन गईं देवी !

3 thoughts on “प्रेम: जीवन का सबसे खूबसूरत अहसास”