फरमाइश

ज़ख्मों की जलन, स्मृतियों की लहरें और खुशी की राख सब मिलकर दिल पर ऐसा बोझ डाल देते हैं कि मुस्कुराना भी एक फरमाइश-सा लगता है। जब भीतर बुझा हुआ चिराग ही रोशनी तलाश रहा हो, तो हौसले की एक किरण भी बड़ी मुश्किल से जन्म लेती है।

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