प्रेम में ‘मैं’ नहीं, ‘तुम’ भी ज़रूरी
हर रिश्ते में हम अपनी पसंद और इच्छाओं की बात करते हैं, लेकिन क्या कभी सामने वाले की चाहत के बारे में सोचते हैं? प्रेम और अपनापन तभी गहरा होता है, जब ‘मैं’ के साथ ‘तुम’ को भी बराबर जगह मिलती है।

हर रिश्ते में हम अपनी पसंद और इच्छाओं की बात करते हैं, लेकिन क्या कभी सामने वाले की चाहत के बारे में सोचते हैं? प्रेम और अपनापन तभी गहरा होता है, जब ‘मैं’ के साथ ‘तुम’ को भी बराबर जगह मिलती है।