फिर वही सपना
कुछ ख़्वाब आँखों में पलते हैं, कुछ दहलीज़ तक आकर लौट जाते हैं। ‘फिर वही सपना’ एक ऐसी भावुक कविता है, जिसमें अधूरी ख़्वाहिशों, अतीत की परछाइयों और बिखरते सपनों की पीड़ा को सुई-धागे के सुंदर रूपक के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।

कुछ ख़्वाब आँखों में पलते हैं, कुछ दहलीज़ तक आकर लौट जाते हैं। ‘फिर वही सपना’ एक ऐसी भावुक कविता है, जिसमें अधूरी ख़्वाहिशों, अतीत की परछाइयों और बिखरते सपनों की पीड़ा को सुई-धागे के सुंदर रूपक के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।