चिड़िया
22 वर्ष की एक नवविवाहिता, दूर-दराज़ के सरकारी अस्पताल में तैनात पति और एक सुनसान सरकारी मकान। पति के दौरे पर चले जाने के बाद अकेलेपन से जूझती उस स्त्री की दुनिया माँ की यादों और किताबों के सहारे चलती है। एक सर्द रात खिड़की के बाहर चिड़िया की आवाज़ उसके भीतर दबे अतीत का ऐसा दरवाज़ा खोल देती है, जहाँ माँ का आँचल, अब्बा का दुलार और बचपन की सुरक्षित दुनिया फिर जीवित हो उठती है।
