gulmohar
दादी के आँचल का सिरा पकड़े पार्क में चलती छोटी पोती

दादी का आँचल

अमिता श्रीवास्तव “दादी, हाथ कहाँ पोंछूँ?” मॉल के फूड कोर्ट में वॉफल खाकर चॉकलेट से सनी अपनी नन्हीं हथेलियाँ लिए अंबू मेरे सामने खड़ी थी। पाँच साल की अंबिका मेरी अंबू थी। “रुको, अभी रूमाल देती हूँ।” कहकर जैसे ही मैं अपना पर्स खोलने चली, उसने झट मेरे आँचल में अपनी हथेलियाँ पोंछ लीं। क्रीम…

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