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तुम और तुम्हारी यादें…

उस स्त्री की पीड़ा जो भुलाने की हर कोशिश के बावजूद स्मृतियों से मुक्त नहीं हो पाती। वादों से भरे प्रेम का अचानक टूट जाना, चुपचाप सहा गया अत्याचार और अकेलेपन में बहते आँसू—सब मिलकर एक ऐसी कहानी रचते हैं जहाँ प्रेम भले ही दूर हो जाए, पर उसकी यादें भीतर ज़िंदा रहती हैं। दूरी के बावजूद दो आत्माएँ एक-दूसरे की प्रतीक्षा में बँधी रहती हैं, जैसे एक ही परिंदे के दो पंख।

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