gulmohar
आधे उजाले और आधे अँधेरे में खड़ा नक़ाब पहने व्यक्ति, दोहरे चेहरे का प्रतीक

चेहरे और नक़ाब

हर चमकती चीज़ रोशनी नहीं होती और हर मीठी ज़ुबान के पीछे नेक इरादे नहीं होते। यह कविता उन चेहरों की हक़ीक़त सामने लाती है, जो सच का लबादा ओढ़कर झूठ, छल और बनावटी अपनाइयत के पीछे अपनी असलियत छिपाए बैठे हैं।

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