चेहरे और नक़ाब
हर चमकती चीज़ रोशनी नहीं होती और हर मीठी ज़ुबान के पीछे नेक इरादे नहीं होते। यह कविता उन चेहरों की हक़ीक़त सामने लाती है, जो सच का लबादा ओढ़कर झूठ, छल और बनावटी अपनाइयत के पीछे अपनी असलियत छिपाए बैठे हैं।

हर चमकती चीज़ रोशनी नहीं होती और हर मीठी ज़ुबान के पीछे नेक इरादे नहीं होते। यह कविता उन चेहरों की हक़ीक़त सामने लाती है, जो सच का लबादा ओढ़कर झूठ, छल और बनावटी अपनाइयत के पीछे अपनी असलियत छिपाए बैठे हैं।