सोशल मीडिया पर वह
चारदीवारी में गुमसुम रहने वाली स्त्री जब सोशल मीडिया पर अपने शब्दों के सहारे बोलने लगती है, तो उसकी भावनाओं, प्रतिभा और अस्तित्व को नई पहचान मिलती है। छाया सीमा खंडागळे की यह कविता डिजिटल दुनिया में नारी की अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास को रेखांकित करती है।
