gulmohar
मायके की याद और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच खड़ी एक भारतीय महिला

औरत का मायका: सामने होकर भी कितना दूर

बेटी से बहू, पत्नी और माँ बनने के सफर में औरत कब अपनी इच्छाओं को पीछे छोड़ देती है, उसे पता ही नहीं चलता। मायका सामने होकर भी दूर रह जाता है। यह कविता स्त्री की जिम्मेदारियों, मायके की यादों और उसके हिस्से के सुकून की मार्मिक अभिव्यक्ति है।

Read More