मुन्ना से कीर्ति राणा
भास्कर इंदौर की सिटी डेस्क की जिम्मेदारी मिलने से लेकर नई काइनेटिक होंडा और सांप्रदायिक तनाव के बीच रिपोर्टिंग तक, यह संस्मरण पत्रकारिता के उन दिनों की यादें समेटता है, जब हर खबर के साथ जोखिम और जिम्मेदारी जुड़ी होती थी।

भास्कर इंदौर की सिटी डेस्क की जिम्मेदारी मिलने से लेकर नई काइनेटिक होंडा और सांप्रदायिक तनाव के बीच रिपोर्टिंग तक, यह संस्मरण पत्रकारिता के उन दिनों की यादें समेटता है, जब हर खबर के साथ जोखिम और जिम्मेदारी जुड़ी होती थी।
यह कहानी एक ऐसे जांबाज पत्रकार की है, जिसने अपनी पत्रकारिता में कामरेडी अंदाज कभी नही छोड़ा.. वह इंदौर का कल का मुन्ना..आज शहर नहीं देश का एक अच्छे पत्रकारों में शुमार है यह कहानी उसी की जुबानी है. मुन्ना कैसे पत्रकार कीर्ति राणा बना. घटना, देशकाल वातावरण सभी उन्हीं की पुस्तक किस्से कलमगिरी से लिए गए हैं. (कीर्ति राणा की किताब किस्से कलमगिरी के की यह सीरीज 4के पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी. ऐसा मेरा विश्वास है)