उज्जैन से संत हिरदाराम नगर के बीच श्रावण मास में विशेष ट्रेन 26 से

श्रावण मास में उज्जैन में बढ़ती भीड़ को देखते हुए पश्चिम रेलवे ने उज्जैन और संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) के बीच 26 जुलाई से 31 अगस्त तक रोज चलने वाली विशेष अनारक्षित ट्रेन की सुविधा शुरू की है। यह ट्रेन विशेष किराए पर चलेगी और महाकाल दर्शन को आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए लाभकारी साबित होगी।

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बूँदों की पदचाप…

मैं ध्यानमग्न होकर आज वर्षा की बूँदों की पदचाप सुन रही हूँ। ये बूँदें जैसे कोई देववधू बनकर घूँघट काढ़े आई हों और धरती से मधुर आलिंगन कर उसका संताप हर रही हों। मिट्टी में मिलकर अंकुरित होने लगीं, मानो जीवन की नई कोंपलें फूटने लगी हों। पूरी प्रकृति जैसे किसी रचनात्मक क्रीड़ा में सम्मिलित हो गई हो। इन बूँदों ने तन-मन को धोकर शुद्ध कर दिया, और भीतर की Maya को खोज निकाला। प्रत्येक बूँद अब एक मोती बन गई है, जिसे मन सहेज रहा है, मानो किसी गूढ़ तत्व से मिलने का जाप हो रहा हो।

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ना रोक खुद को अब…

हर कठिनाई से लड़ने की ताकत रखती है तू, तो फिर सुन स्त्री, अब अपने स्त्री होने पर शर्म नहीं, गर्व किया कर। जहाँ मन लगे, वहाँ दिल लगाना तेरा अधिकार है, और आईने में मुस्कुराकर खुद को पहचानना भी। तू सिर्फ जिम्मेदारियों में नहीं, हक़ में भी जी सकती है – खुद से प्यार कर, खुद को सजा, और दुनिया को दिखा कि तू क्या है।”

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महाकाल की महिमा अब सिनेमा में

साउथ सुपरस्टार पवन कल्याण अभिनीत मेगा बजट फिल्म ‘हरिहर वीरमल्लू (धर्मयुद्ध)’ 24 जुलाई को देशभर में पांच भाषाओं में रिलीज हुई। इस ऐतिहासिक फिल्म में उज्जैन के भस्म रमैया भक्त मंडल को धर्म की धुरी के रूप में विशेष भूमिका मिली है। यह फिल्म विदेशी आक्रांताओं द्वारा भारत में किए गए मंदिरों के विध्वंस और सनातन धर्म की रक्षा में समर्पित वीरमल्लू के जीवन पर आधारित है। फिल्म में पवन कल्याण ने धर्मरक्षक वीरमल्लू की भूमिका निभाई है, जबकि बॉबी देओल औरंगज़ेब के रूप में नजर आएंगे।

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महाकाल की भक्ति और सेवा: कावड़ यात्रियों के लिए अन्नक्षेत्र

श्रावण मास में उज्जैन आने वाले कावड़ यात्रियों के लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी शनि मंदिर के पास अस्थायी अन्नक्षेत्र की शुरुआत की है, जहाँ प्रतिदिन नि:शुल्क भोजन वितरित किया जा रहा है। यह भोजन महाकाल मंदिर के अन्नक्षेत्र में तैयार होकर भगवान को भोग लगाने के बाद यात्रियों तक पहुँचाया जाता है। समिति द्वारा सोमवार को व्रती भक्तों के लिए फलाहारी खिचड़ी और चिप्स की भी विशेष व्यवस्था की गई है। वर्ष 2004 से यह अन्नक्षेत्र परंपरा रूप से संचालित हो रहा है, जो भक्तों के दान से चलती है। विशेष अवसरों पर श्रद्धालु भोजन प्रसादी के लिए मंदिर को दान भी करते हैं। पहले सोमवार को 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अन्नक्षेत्र का लाभ उठाया।

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सरस्वती वन्दना

यह कविता एक साधिका की अंतरतम पुकार है, जिसमें वह माँ से प्रार्थना करती है कि उसका अंतर्मन शुद्ध, निर्मल और विकारों से रहित हो जाए। वह चाहती है कि उसका प्रत्येक श्वास एक श्रद्धा से भरा पूजन बन जाए, और उसका मन ऐसा हो जैसे मुस्काता हुआ वृंदावन। कविता में भक्ति का भाव सहज रूप से बहता है — कभी वह मन की वीणा पर माँ की महिमा का गीत गाना चाहती है, तो कभी बनमाली को खोजती हुई नंदनवन की ओर बढ़ती है।
कवयित्री अपने जीवन में अवरोधों को दूर कर विश्वास की गली में ‘निवी’ नामक दीप जलाकर गतिमान बनने की आकांक्षा रखती है। यह रचना केवल भक्ति नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और चेतना के उजास की ओर यात्रा है।

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आदर, मंच और धोखा

“एक दिन अचानक सरला के खाते में साढ़े तीन लाख रुपये आ जाते हैं। कोई जानकारी नहीं, कोई सूचना नहीं। थोड़ी ही देर में एक फोन आता है—‘मैं रामभरोस बोल रहा हूं, मेरी बहू से गलती से आपके खाते में पैसे आ गए हैं, लौटा दीजिए।’ सरला चौंक जाती है। क्या यह कोई साजिश है या ईमानदारी? चेक लौटाया जाता है। लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकती। वह आदमी बार-बार घर आने लगता है—कभी चाय पर, कभी मोहल्ले में गाड़ी खड़ी करने के बहाने। उसके शब्दों में ‘मिशन’, ‘समाजसेवा’ और ‘फायदा’ की मीठी-मीठी बातें होती हैं।

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नागदा में समय पर उपचार ने बचाई 30 वर्षीय युवक की जान

नागदा में चौधरी हॉस्पिटल के डॉ. सुनील चौधरी ने समय पर उपचार कर 30 वर्षीय सनी गोयल की जान बचाई। अचानक आए हार्ट अटैक के बाद डॉक्टर की तत्परता और अनुभवी निर्णय से युवक को नया जीवन मिला। परिजनों ने डॉक्टर की टीम का आभार जताया और लोगों ने सेवाभाव की सराहना की।

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सेठ नहीं साक्षात श्याम हैं सांवरिया

जय सांवरिया सेठ के जयकारों के बीच मंगलवार को संतोष विश्वकर्मा के नेतृत्व में 60 श्रद्धालुओं का जत्था श्री सांवरिया सेठ मंदिर, मंडपिया (राजस्थान) के लिए रवाना हुआ। नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर विदाई दी, और भक्तों ने कहा— यह यात्रा नहीं, आत्मा की पुकार है।

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भारत में नीली आंखें: एक रहस्यमयी विरासत

भारत की गलियों में जब कोई बच्चा नीली आंखों के साथ मुस्कराता है या जब पर्दे पर ऋतिक रोशन, करिश्मा कोटक या निकोल फारिया जैसे सितारों की नीली आंखें चमकती हैं, तो एक सवाल हर किसी के मन में जरूर उठता है – “भारत जैसे सांवले-त्वचा प्रधान देश में ये नीली आंखें आखिर आई कहां से?”

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