महाकाल की महिमा अब सिनेमा में

साउथ सुपरस्टार पवन कल्याण अभिनीत मेगा बजट फिल्म ‘हरिहर वीरमल्लू (धर्मयुद्ध)’ 24 जुलाई को देशभर में पांच भाषाओं में रिलीज हुई। इस ऐतिहासिक फिल्म में उज्जैन के भस्म रमैया भक्त मंडल को धर्म की धुरी के रूप में विशेष भूमिका मिली है। यह फिल्म विदेशी आक्रांताओं द्वारा भारत में किए गए मंदिरों के विध्वंस और सनातन धर्म की रक्षा में समर्पित वीरमल्लू के जीवन पर आधारित है। फिल्म में पवन कल्याण ने धर्मरक्षक वीरमल्लू की भूमिका निभाई है, जबकि बॉबी देओल औरंगज़ेब के रूप में नजर आएंगे।

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महाकाल की भक्ति और सेवा: कावड़ यात्रियों के लिए अन्नक्षेत्र

श्रावण मास में उज्जैन आने वाले कावड़ यात्रियों के लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी शनि मंदिर के पास अस्थायी अन्नक्षेत्र की शुरुआत की है, जहाँ प्रतिदिन नि:शुल्क भोजन वितरित किया जा रहा है। यह भोजन महाकाल मंदिर के अन्नक्षेत्र में तैयार होकर भगवान को भोग लगाने के बाद यात्रियों तक पहुँचाया जाता है। समिति द्वारा सोमवार को व्रती भक्तों के लिए फलाहारी खिचड़ी और चिप्स की भी विशेष व्यवस्था की गई है। वर्ष 2004 से यह अन्नक्षेत्र परंपरा रूप से संचालित हो रहा है, जो भक्तों के दान से चलती है। विशेष अवसरों पर श्रद्धालु भोजन प्रसादी के लिए मंदिर को दान भी करते हैं। पहले सोमवार को 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अन्नक्षेत्र का लाभ उठाया।

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नागदा में समय पर उपचार ने बचाई 30 वर्षीय युवक की जान

नागदा में चौधरी हॉस्पिटल के डॉ. सुनील चौधरी ने समय पर उपचार कर 30 वर्षीय सनी गोयल की जान बचाई। अचानक आए हार्ट अटैक के बाद डॉक्टर की तत्परता और अनुभवी निर्णय से युवक को नया जीवन मिला। परिजनों ने डॉक्टर की टीम का आभार जताया और लोगों ने सेवाभाव की सराहना की।

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सेठ नहीं साक्षात श्याम हैं सांवरिया

जय सांवरिया सेठ के जयकारों के बीच मंगलवार को संतोष विश्वकर्मा के नेतृत्व में 60 श्रद्धालुओं का जत्था श्री सांवरिया सेठ मंदिर, मंडपिया (राजस्थान) के लिए रवाना हुआ। नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर विदाई दी, और भक्तों ने कहा— यह यात्रा नहीं, आत्मा की पुकार है।

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राही राज़ को साहित्य सम्मान और प्रीति राही को संगीत सम्मान

श्री सिद्धार्थ सांस्कृतिक परिषद का वार्षिक उत्सव बिहार भवन, बैंगलोर में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। राही राज़ को साहित्य सम्मान और प्रीति राही को संगीत सम्मान प्राप्त हुआ।

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इंदौरियत जिंदा है…..

इंदौर ने स्वच्छता में लगातार आठवीं बार पहला स्थान पाकर यह सिद्ध कर दिया है कि जब नागरिक जागरूक हो जाएं तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं। जहां देश के कई शहरों में सफाईकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहीं इंदौर में उन्हें हार पहनाकर सम्मानित किया जा रहा है। यह सिर्फ स्वच्छता की जीत नहीं, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता की जीत है। इंदौर ने साबित किया है कि शहर की खूबसूरती केवल सड़कें नहीं, बल्कि वहां के लोगों का दिल भी होता है।

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कचरे से खाद बनता देखचकित हो गए थे गांधीजी…

“जिन अंग्रेजों के ज्ञान को हम श्रेष्ठ मानते हैं, उन्हें जैविक खाद का ज्ञान बिहार और इंदौर के अनपढ़ किसानों ने दिया था। यही कारण है कि ‘इंदौर कंपोस्ट सिस्टम’ को वैश्विक पहचान मिली और गांधीजी स्वयं इसे समझने इंदौर आए। 1925 में अल्बर्ट हॉवर्ड ने इंदौर में कंपोस्ट खाद पर शोध कर पूरी दुनिया को प्राकृतिक खेती का संदेश दिया। सौ साल पहले भारतीय किसान पेड़ों की पत्तियों, गोबर और प्राकृतिक अवशेषों से जो खाद बनाते थे, वही आज भी मिट्टी की सेहत के लिए सबसे उपयोगी है। इंदौर नगर निगम ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने वार्डों में कंपोस्ट खाद प्लांट लगाकर आधुनिक नगरीय कृषि में नया अध्याय जोड़ा है।”

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वरिष्ठ कवयित्री निवेदिता श्रीवास्तव ‘गार्गी’ को मिला विद्यावाचस्पति सम्मान

हरिद्वार में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में झारखंड की साहित्य साधिका को सम्मानित किया गया हरिद्वार, 12 जुलाई 2025 — साहित्यिक जगत के लिए यह गर्व का क्षण रहा जब झारखंड की वरिष्ठ कवयित्री निवेदिता श्रीवास्तव ‘गार्गी’ को विद्यावाचस्पति सम्मान से अलंकृत किया गया। यह सम्मान उन्हें हरिद्वार में आयोजित एक भव्य कवि सम्मेलन के…

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शताब्दी समारोह की ऐतिहासिक गूंज

भारतीय रेलवे की ऐतिहासिक धरोहरों को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से मध्य रेल ने ‘स्टेशन महोत्सव’ के तहत मुंबई मंडल के 6 हेरिटेज स्टेशनों पर शताब्दी समारोह का आयोजन किया। रेलवे बोर्ड की सलाह पर आयोजित इस विशेष समारोह ने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी), रे रोड, आसनगांव, वासिंद, कसारा और इगतपुरी स्टेशनों को इतिहास, संस्कृति, तकनीक और उत्सव के रंगों से सराबोर कर दिया।

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बंगलौर में मिथिला महोत्सव:

“बंगलौर की धरती पर मिथिला समाज ने पहली बार संगठित होकर अपनी सांस्कृतिक शक्ति का एहसास कराया। पान, माछ, मखान के स्वाद और धरती से जुड़ने की परंपरा ने यह साबित कर दिया कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही पहचान बचती है।”

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