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मेहनत की खुशबू से महका कारवाँ

बुरहानपुर की प्रतिभाशाली बच्चियों को उपलब्धियों के लिए सम्मानित करते हुए। बच्चों की मेहनत, प्रतिभा और गुरु के आशीष से सजी सफलता की कहानी।

रुपाली पुरे, खंडवा

किसी की आँखों में सपनों का उजाला मिल गया,
किसी के हुनर को आज नया किनारा मिल गया।

सिद्धि ने गीतों में अपनी आवाज़ ऐसी भर दी,
कि सुरों को भी जैसे मधुर सहारा मिल गया।

वैष्णवी ने अभिनय से भावों को जीवंत कर दिया,
मंच पर उसके हुनर को प्रथम सितारा मिल गया।

कियरा के नृत्य ने बाँध लिया सबको पल भर,
थिरकते कदमों को जीत का इशारा मिल गया।

आराध्या ने रंगों में सपनों को यूँ सजा दिया,
कि चित्रों को भी जैसे सुंदर नज़ारा मिल गया।

बुरहानपुर की राहों में जो साथ बनकर चलीं,
हर कदम पर बच्चों को हौसलों का सहारा मिल गया।

ये पदक सिर्फ़ बच्चों की जीत नहीं है आज,
इसमें किसी की दुआ से सफलता का सितारा मिल गया।

मेहनत जब गुरु के आशीष से मिल जाती है,
तो साधारण-सा प्रयास भी जग में न्यारा बन जाता है।

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