आइना पूछता है…

आइना अब मुझसे पूछता है कि मैं कौन हूँ, किसकी तस्वीर हूँ। मेरा चेहरा तो सामने है, लेकिन मेरी परछाईं में किसी और की तासीर बसती है। पलकों पर ठहरे मौसम और होठों पर आधी मुस्कान—यह सब उसने छोड़ा था, शायद किसी अनकहे ग़म की पहचान के तौर पर। हर दिन सवेरा आता है, लेकिन उजियारा अधूरा-सा लगता है। रास्ते वही हैं, कदम वही हैं, पर मन अब पूरा नहीं लगता। मेरे भीतर यादों का एक घर है, जहाँ खामोशियाँ अपनी भाषा में बोलती हैं। जब मैं आइने में खुद को देखता हूँ, तो लगता है कि वह अब भी मुझमें कहीं डोलती हैं। शायद इसी वजह से आइना एक दिन डर गया—कैसे दिखाए वो सूरत, जो अब किसी और के असर में जी रही है।

Read More

मैं कब से थी नीर की बदरी

कविता में एक स्त्री अपनी जीवन-यात्रा को स्मरण करती है। वह बताती है कि बचपन में वह माता-पिता की दुलारी थी—माँ की गुड़िया और पिता की आँखों की पुतली। आँगन और गलियों में सखियों संग खेलते-खेलते उसने प्रेम और रिश्तों को सँजोया।

फिर सपनों से भरे मन के साथ विवाह के बाद विदा हुई, नए रिश्तों की डोर बाँधी। परंतु आगे चलकर उसका जीवन वैसा सुखद नहीं रहा। पवित्र दांपत्य बंधन टूट गया, कई रातें अधूरी रह गईं। उसकी आँखें बरसती रहीं, पर मन का आँगन सूखा पड़ा रहा। इस कविता में बचपन की निश्छलता, विवाह का सपना और फिर विरह तथा विफलता की वेदना—तीनों भाव गहराई से व्यक्त हुए हैं।

Read More
अकेला व्यक्ति उदास बैठा हुआ, दिल टूटने और तन्हाई के भाव को दर्शाता हुआ

क्या कहें हम

यह ग़ज़ल टूटे दिल, अधूरी उम्मीदों और बेवफाई के गहरे दर्द को बयां करती है। हर शेर उस पीड़ा को छूता है, जहाँ अपना ही इंसान अजनबी बन जाता है। यह रचना उन अनकहे जज़्बातों की आवाज़ है, जिन्हें शब्दों में कहना आसान नहीं होता।

Read More

 पुणे में  ‘उगम’ संगीत कार्यक्रम17 अगस्त को

प्रसिद्ध हारमोनियम वादक तन्मय देवचके की स्वरानुजा संगीत अकादमी की और से रविवार, 17 अगस्त 2025 को ‘उगम’ कार्यक्रम का चौथा संस्करण आयोजित किया जाएगा । यह कार्यक्रम तिलक रोड के न्यू इंग्लिश स्कूल के गणेश हॉल में सुबह 10 बजे से शुरू होगा। कार्यक्रम सभी के लिए निःशुल्क रहेगा और पहले आने वाले रसिकों को प्राधान्य इस आधार पर कार्यक्रम के लिए प्रवेश दिया जायेगा। कुछ सीटें आमंत्रितों के लिए आरक्षित रहेंगी।
इस कार्यक्रम में तन्मय देवचके के दुनिया भर के छात्रों की विशेष प्रस्तुतियाँ होंगी, जो अपनी हारमोनियम कौशल का प्रदर्शन करेंगे। तन्मय देवचके के वरिष्ठ छात्र निलय साळवी और अथर्व कुलकर्णी तबले पर अनीश थत्ते के साथ एकल हारमोनियम वादन करेंगे।

Read More
नानी के गांव में आम के पेड़ के नीचे पुराने टिन के डब्बे को खोजते हुए बच्चे, साथ में मुस्कुराती नानी और गर्मियों की यादों से भरा ग्रामीण वातावरण।

गर्मी की छुट्टियां

यह बाल कहानी आरव की गर्मी की छुट्टियों, नानी के गांव और दोस्ती के खजाने की खोज के जरिए बच्चों को यादों, मित्रता और खुशियां बांटने का सुंदर संदेश देती है।

Read More

“कब कह पाएंगे दिल की बात”

सोनम और राजा की कहानी ने एक बार फिर ये सवाल उठाया है — क्या हमारे समाज में किसी लड़की को सच कहने की आज़ादी है? जब रिश्तों में संवाद की जगह चुप्पी ले लेती है, तब वही चुप्पी कभी किसी की जान ले सकती है… और कभी किसी की जान बचा भी सकती है।

Read More
एक आत्मविश्वासी युवती सूर्योदय के समय छत पर खड़ी है, उसके पास टूटा हुआ पिंजरा पड़ा है और आसमान में उड़ते पक्षी आज़ादी और सपनों की उड़ान का प्रतीक हैं।

उड़ान

‘उड़ान’ एक प्रेरणादायक हिंदी कविता है, जो लड़कियों के आत्मसम्मान, स्वतंत्र सोच और सपनों को पंख देने की बात करती है। यह कविता समाज की बंदिशों के विरुद्ध हौसले और विश्वास का संदेश देती है।

Read More
रसोई में नई बहू कढ़ाही में हलवा बनाते हुए, पास खड़ी सास गर्व और स्नेह से मुस्कुराते हुए देख रही हैं, चारों ओर पारंपरिक घरेलू वातावरण

उम्मीद से बढ़कर

यह कहानी पारिवारिक रिश्तों में छिपी सहजता और पूर्वाग्रहों के टूटने की एक मधुर झलक प्रस्तुत करती है। जहाँ सास को अपनी पढ़ी-लिखी बहू से रसोई की उम्मीद नहीं होती, वहीं बहू अपनी सरलता और संस्कारों से सबका मन जीत लेती है। छोटी-सी घटना के माध्यम से यह रचना बताती है कि सच्ची खुशी अक्सर हमारी उम्मीदों से कहीं बढ़कर होती है और रिश्तों में विश्वास व अपनापन ही सबसे बड़ा मूल्य है।

Read More
रात के शांत माहौल में खिड़की के पास बैठी लड़की, खामोश मोहब्बत और अनकहे प्यार के भावों में डूबी हुई

खामोश मोहब्बत

कुछ प्यार ऐसे होते हैं जो कभी शब्दों में नहीं ढलते, फिर भी सबसे सच्चे होते हैं। “खामोश मोहब्बत” एक ऐसी ही अनकही भावनाओं की कविता है, जो दिल को छू जाती है।

Read More
ज्ञान मंदिर में पुण्यसम्राट श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी के दीक्षा दिवस पर आयोजित गुरु भक्ति कार्यक्रम Image Caption

गुरु कृपा से पावन हुआ ज्ञान मंदिर

पुण्यसम्राट श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. के दीक्षा दिवस पर ज्ञान मंदिर में दिनभर गुरु भक्ति, प्रवचन, तप, जाप और महाआरती के आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए.

Read More