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वृन्दावन नाव हादसा: य

यमुना में हादसा या सिस्टम की विफलता ?

वृन्दावन में यमुना नदी में हुआ नाव हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढिलाई, संचालकों की लापरवाही और जनता की अनदेखी का परिणाम है। यह घटना सामूहिक जिम्मेदारी और सुरक्षा के प्रति जागरूकता की जरूरत को उजागर करती है।

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यह घर बहुत हसीन है

मेरी ज़िंदगी एक जगह से शुरू नहीं हुई।
वह एक किराए के मकान से दूसरे तक भटकती रही। यह घर सिर्फ़ ईंट और सीमेंट से नहीं बना, इसमें हमारे डर, संघर्ष और सपने बसे हैं। इसीलिए यह साधारण-सा घर मेरे लिए बहुत हसीन है।

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माँ जैसी नहीं हूं मैं…

यह कविता एक आत्मस्वीकृति है — एक बेटी की अपनी माँ के प्रति संवेदनाओं, निरीक्षणों और अनुभवों की गहराई से उपजी भावनाओं की अभिव्यक्ति। वह कहती है कि वह अपनी माँ की खामोशी पढ़ लिया करती थी, माँ के संघर्षों और त्याग की साक्षी रही है। माँ की आँखों में छिपे दर्द, जीवन की कठोर सच्चाइयों से संघर्ष, और अपनी इच्छाओं को निस्वार्थ भाव से दबा देने का दृश्य उसने बार-बार देखा।

वह माँ की हर वह चुप्पी पहचानती थी, जिसे दुनिया अनदेखा कर देती है। माँ के आँचल से आँसू पोछने से लेकर, चाँदनी रातों में अपने दुखों से बात करने तक की हर एक लम्हा, बेटी के मन में गहरे बैठ गया।

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खुशबू से बंधा पहला प्यार

यह कविता मानो खुशबुओं का एक जीवन वृत्तांत है। हर स्मृति, हर अनुभव एक विशेष सुगंध से जुड़कर अमर हो गया है। पहली बारिश की मिट्टी की महक, प्रियतम की मीठी बातों की महक, किताबों से उठती खुशबू, हाथों में महंदी की गंध, गहनों में समाया पसीना, खिड़की से आती रातरानी की महक और तन पर चंदन की सुगंध—सब कुछ उसके प्रेम और साथ के अनुभवों से गुँथा हुआ है। यह केवल प्रेम की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उन अदृश्य अनुभूतियों का बयान है जो इंद्रियों से परे जाकर हृदय में स्थायी छाप छोड़ देती हैं। हर खुशबू, एक स्मृति बनकर जीती है और हर स्मृति में प्रेम की गहराई झलकती है।

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इसी तरह सोचो

यह कविता जीवन और संघर्ष की कठिनाइयों में महिलाओं को आत्मनिर्भर और साहसी बनने का संदेश देती है। कविता में बताया गया है कि जैसे लोहा आग में पिघलकर भी अपनी ताकत नहीं खोता, वैसे ही महिलाओं को भी कठिन परिस्थितियों में अपने साहस और आत्मविश्वास को बनाए रखना चाहिए। ‘बिटिया’ के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि जीवन के जंगल में जिंदा रहने के लिए हिम्मत, धैर्य और साहस आवश्यक हैं।

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गिलास में ताजा सफेद दूध, पास में फल और अनाज, स्वास्थ्यवर्धक आहार का दृश्य

दूध बड़ा गुणकारी है

दूध बड़ा गुणकारी है” एक शिक्षाप्रद हिंदी कविता है जो दूध के पोषण गुणों और स्वास्थ्य लाभों को सरल शब्दों में प्रस्तुत करती है। यह कविता बच्चों और बड़ों दोनों को नियमित दूध पीने के लिए प्रेरित करती है।

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छत्रपति संभाजीनगर हादसा

डराने के लिए पहाड़ी पर चढ़ा था कुणाल फिर एक पल में उजड़ गया पूरा परिवार

खवड्या पहाड़ हादसे में चांदगुडे परिवार के तीन सदस्यों की मौत के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है. परिजनों ने iPhone की EMI को हादसे की मुख्य वजह मानने से इनकार किया है और पारिवारिक विवाद को लेकर अलग जानकारी सामने रखी है.

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कुछ रंग ऐसे भी… | रिश्तों, धोखे और ख़ामोशी पर विचारशील कविता

कुछ रंग ऐसे भी…

यह कविता जीवन के उस कैनवास की कथा है, जहाँ धोखे और बनावटी रंग इतने फैल जाते हैं कि प्रेम, अपनेपन और आत्मा के रंग खो से जाते हैं, और बचती है केवल ख़ामोश उदासी।

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भक्ति और श्रद्धा के सागर में डूबा नगर

नगर में आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति की अनुपम छटा देखने को मिली, जब श्रीराम हनुमान मंदिर सेवा समिति के तत्वाधान में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ. बैंड-बाजों की मधुर धुन, ढोल-नगाड़ों की थाप और हरिनाम के जयघोष से पूरा नगर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया. सैकड़ों श्रद्धालुओं की सहभागिता, पुष्पवर्षा और श्रद्धा भाव ने इस पावन आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया. पं. सुनीलकृष्ण व्यास के ओजस्वी प्रवचनों ने कथा के प्रथम दिवस को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया, जिससे नगरवासियों में शांति, भक्ति और आनंद का संचार हुआ.

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संयुक्त परिवार में नई बहू और बड़ी महिला के बीच बनते अपनापन और भावनात्मक रिश्ते का दृश्य।

टूटता साथ

यह अध्याय रिद्धिमा की आत्मकथा का संवेदनशील हिस्सा है, जिसमें वह एक नई बहू के साथ बने अपनापन, विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव को याद करती है। रिश्तों की खूबसूरती और उनके भीतर छिपी नाज़ुक सच्चाइयों का मार्मिक चित्रण इसमें उभरता है।

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