फूलों की माला, हवा का राग”

“हर्षित धरा, हर्षित अंबर, कोहरे की विदाई, भौंरे और तितलियों की मुस्कान। दहकते पलाश, हरे-हरे परिधान, पीली सरसों की सजती दुकान। गेहूँ और चने की झूमती बाली, कोयल की मतवाली कूक। अमलतास की झूलती डालियाँ, फूलों की माला लिए प्रीत खड़ी है द्वार पर—सारी धरती बसंत से प्यार में डूबी हुई।”

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एक भारतीय बेटी आत्मविश्वास के साथ खड़ी है, जो “पराया धन” जैसी सामाजिक सोच से परे स्वतंत्र पहचान और आत्मसम्मान का प्रतीक है।

बेटियाँ पराया धन नहीं

“पराया धन” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि वह सामाजिक सोच है जो बेटियों को अपने ही घर में अस्थायी महसूस कराती है। यह लेख स्त्री की स्वतंत्र चेतना, आत्मसम्मान और भावनात्मक सबलता की आवश्यकता पर गंभीर प्रश्न उठाता है और समाज से आग्रह करता है कि बेटियों को संपत्ति नहीं, स्वतंत्र व्यक्तित्व की तरह देखना सीखे।

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विटामिन डी सिर्फ हड्डियों का नहीं, दिमाग, दिल और इम्यून सिस्टम का भी छुपा रक्षक

सिर्फ हड्डियों का नहीं विटामिन डी

थकान, डिप्रेशन और दिल से जुड़ा अनदेखा रिश्ता भारत को सूरज का देश कहा जाता है, फिर भी एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने है. हर दस में से लगभग आठ भारतीयों में विटामिन डी की कमी पाई जाती है. वर्षों तक हमें यही सिखाया गया कि विटामिन डी केवल हड्डियों के लिए जरूरी है. सच…

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बारिश के बाद बालकनी में खड़ी एक भावुक महिला आसमान में इंद्रधनुष देख रही है, यादों और अधूरे प्रेम का संवेदनशील दृश्य।

उम्र के गणित

उम्र के गणित” एक संवेदनशील हिंदी कहानी है, जो प्रेम, उम्र और सामाजिक सोच के बीच चलने वाले संघर्ष को दर्शाती है। कहानी में एक युवक अपने सच्चे प्रेम का इज़हार करता है, लेकिन उम्र के अंतर के कारण उसे स्वीकार नहीं किया जाता। समय बीतने के बाद एहसास होता है कि प्रेम उम्र का नहीं, भावनाओं और समझदारी का विषय है। संवादों और भावनात्मक घटनाओं से सजी यह कहानी पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है कि कई बार हम समाज के गणित में दिल की सच्चाई खो देते हैं।

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श्रीराम भक्ति कविता दर्शाता हुआ दिव्य और शांत भाव का दृश्य

श्रीराम भक्ति कविता

मर्यादा, त्याग और सत्य की अनुपम मिसाल— श्रीराम के जीवन पर आधारित यह प्रेरणादायक हिंदी कविता भक्ति और धर्म का गहरा संदेश देती है। इस सुंदर रचना के माध्यम से जानिए कैसे श्रीराम के आदर्श आज भी हमारे जीवन को दिशा देते हैं।

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तूफानी रात में घर के अंदर डरी हुई महिला फोन उठाते हुए, सस्पेंस भरा माहौल

अब क्या होगा

आधी रात…
तूफ़ान अपने चरम पर था और घर के भीतर एक अजीब सन्नाटा पसरा हुआ था।अचानक फोन की घंटी गूंजी और शेफाली का दिल जैसे धड़कना भूल गया। सब कुछ सामान्य लग रहा था…पर फिर भी, उसके भीतर कुछ था जो कह रहा था सब ठीक नहीं है…

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दो चेहरे

आज का समाज दो चेहरों में जी रहा है एक वह जो भीतर सचमुच है और दूसरा वह जो बाहर दुनिया को दिखाया जाता है। खुशियाँ अब साझा कम और तुलना ज़्यादा बन गई हैं, जहाँ किसी की तरक्की दूसरे के भीतर जलन जगा देती है। झूठे वादों और बनावटी शान-ओ-शौकत के शोर के बीच बचपन चुपचाप वही सीख रहा है जो हम जी रहे हैं। अगर समय रहते हम नहीं संभले, तो आने वाली पीढ़ी को सच्चाई नहीं, बल्कि सिर्फ़ दिखावे से भरी एक चमकदार लेकिन खोखली दुनिया विरासत में मिलेगी।

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रामघाट उज्जैन में हिंदू नववर्ष पर सूर्य को अर्घ्य देते श्रद्धालुओं की भीड़ AI IMAGE

उज्जैन में नववर्ष पर उमड़ा सैलाब, रामघाट पर दिखी आस्था

उज्जैन में हिंदू नववर्ष 2083 की शुरुआत रामघाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ और सूर्य अर्घ्य के साथ हुई. चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ पर मंदिरों में विशेष पूजा और आयोजन शुरू हो गए हैं.

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