Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

शक्ति हो माँ

माँ, तुम ममता की मूर्ति हो, धीरज और करुणा का अथाह सागर। तुम्हारे आगे शब्द भी छोटे पड़ जाते हैं। आकाश तुम्हें नमन करता है और धरती तुम्हारी आरती उतारती है। जीवन के हर सुख-दुख में तुम्हारा हाथ थाम लेने से मन को संबल मिलता है। मेरी प्रत्येक साँस तुम्हारी ही देन है, हर क्षण तुम्हारे ध्यान में ही बीतता है।

जब-जब मन डगमगाता है, आँखों में तुम्हारा रूप बसाकर स्थिरता मिलती है। तुम्हारे चरणों में सिर झुकाना ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। अंतिम क्षणों में भी यदि तुम्हारे दर्शन मिल जाएँ तो जीवन सार्थक हो जाएगा।

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सुबह की सुनहरी रोशनी में हाथ में चाय का प्याला लिए एक भारतीय महिला खिड़की के पास खड़ी है। बाहर ओस से भीगे फूल, दूर पहाड़ और बहता झरना दिखाई दे रहा है। वातावरण शांत, आत्मचिंतन और निःस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है।

निःस्वार्थ प्रेम

‘निःस्वार्थ प्रेम’ एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जो स्त्री के मौन, त्याग, धैर्य और प्रेम की गहराई को प्रकृति के सुंदर बिंबों के माध्यम से अभिव्यक्त करती है। यह कविता बताती है कि समय के साथ स्त्री शिकायतों से नहीं, बल्कि अनुभवों से परिपक्व होती है। वह जीवन की कड़वाहट को मुस्कान में बदलना जानती है, बंधनों को पीछे छोड़ देती है और प्रेम के उस रूप को संजोए रखती है, जिसमें अधिकार नहीं, केवल समर्पण होता है। कविता पाठक को प्रेम, आत्मबल और स्त्री के अंतर्मन की अनकही दुनिया से परिचित कराती है।

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हिंदी लेखिका मौसमी चन्द्रा का चित्र, जिनकी रचनाएँ कविता, कहानी और साहित्य संपादन के क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं

मौसमी चंद्रा: एक उर्जावान और संवेदनशील रचनाकार

मौसमी चन्द्रा एक बहुमुखी हिंदी लेखिका और संपादिका हैं, जिनकी रचनाएँ भावनात्मक गहराई और सामाजिक सरोकारों से परिपूर्ण हैं।

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“यादों का लिफाफा”

इस कविता में एक संतान अपनी माँ की यादों और सीख को भावनात्मक रूप में संजोती है। माँ द्वारा दिए गए एक पुराने खत में छिपे भाव उसे आज भी संबल देते हैं। माँ की कही बातें, उसके एहसास, और उसका साथ — सब कुछ आज भी दिल की अलमारी में सजे हुए हैं। वह मानती है कि वह माँ जैसी नहीं बन सकी, लेकिन माँ से जीवन की सच्ची बातें सीखी हैं — मोहब्बत, यारी और कठिनाइयों में टूटे बिना जीना। उजालों की प्रतीक्षा में अंधेरों से जो उसने पाया, वो भी माँ की दी हुई रोशनी से ही संभव हो पाया।

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अच्छाई और बुराई के प्रतीकात्मक रूप में प्रकाश और अंधकार के बीच खड़ा एक चिंतनशील व्यक्ति, जो आत्मचिंतन और मानवीय मूल्यों का संदेश देता है।

भला जो देखन मैं चला…

कलियुग में अच्छाई और बुराई के संघर्ष को प्रस्तुत करती यह विचारोत्तेजक कविता आत्मचिंतन, मानवीय मूल्यों और समाज की बदलती सोच पर गहरा संदेश देती है। कविता बताती है कि सच्ची जीत अच्छाई और सत्य के मार्ग पर चलने में ही है।

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devotees walking in padyatra with drums and chants heading to Sanwariya Seth temple with flowers and devotion

सेठ नहीं साक्षात श्याम हैं सांवरिया

जय सांवरिया सेठ के जयकारों के बीच मंगलवार को संतोष विश्वकर्मा के नेतृत्व में 60 श्रद्धालुओं का जत्था श्री सांवरिया सेठ मंदिर, मंडपिया (राजस्थान) के लिए रवाना हुआ। नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर विदाई दी, और भक्तों ने कहा— यह यात्रा नहीं, आत्मा की पुकार है।

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वो ही माँ बनाने को मन करता है

एक नंगी ईंट की दीवार और उसके पास चूल्हा, जिस पर उपले की आँच में रोटियाँ सिकती हैं। माँ के पास चिमटा तो है, फिर भी कभी-कभी ऐसा लगता है कि उसके जीवन से कुछ पल चुराए जाएँ। उसकी तपती ज़िंदगी, खुरदरी हथेलियाँ और जीवन की सारी सिलवटें यह सब गहरी कहानियाँ बयां करती हैं। समय तो गुजर चुका है, लेकिन जो आँसू उसने छुपाए थे, उन्हें समझने और पोछने की इच्छा रहती है। यह एक नज़दीकी और भावनात्मक दृष्टिकोण है, जिसमें माँ के संघर्ष और उसके भीतर छुपी कोमलता दोनों ही सामने आती हैं।

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महिला काव्य मंच की मासिक काव्य गोष्ठी सम्पन्न

महिला काव्य मंच (मध्य) की लखनऊ इकाई द्वारा 14 नवम्बर 2025 को ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया. कार्यक्रम बाल दिवस के उपलक्ष्य में समर्पित रहा, जिसमें बचपन, मासूमियत, संस्कार, स्मृतियों और जीवन मूल्यों पर आधारित अनेक भावपूर्ण व विविध विधाओं की रचनाएँ प्रस्तुत की गईं. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. ऊषा चौधरी, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश मध्य (मकाम) तथा विशिष्ट अतिथि नोरिन शर्मा, सचिव पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मकाम) रहीं. गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. राजेश कुमारी (राष्ट्रीय अध्यक्षशिक्षा मंच एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मकाम ने की.

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र्दी की आड़ में ठगी का खेल: निलंबित पुलिस हवलदार आंध्र प्रदेश से गिरफ्तार

वर्दी की आड़ में विश्वासघात: पुलिस हवलदार बना ठग

पुणे में सराफों और महिलाओं से लाखों की धोखाधड़ी करने वाला निलंबित पुलिस हवलदार गणेश जगताप आखिरकार आंध्र प्रदेश से गिरफ्तार किया गया. वरिष्ठ अधिकारियों का नाम, पत्नी की बीमारी और बेटी की पढ़ाई जैसे बहानों से उसने भरोसा जीतकर ठगी की. पुलिस अब उसके अन्य मामलों की भी जांच कर रही है.

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मन का अंतरिक्ष… 

यह अंश गहन रूपकों के माध्यम से मन के भीतर उमड़ते भावों और उनके क्रमिक शांत होने की प्रक्रिया को दर्शाता है।
मन के अंतरिक्ष में उल्काओं की तरह तीव्र वेग से बहते विचार और भावनाएँ कई बार टकराव और घर्षण की स्थिति पैदा करते हैं, लेकिन समय के साथ उनकी गति धीमी पड़ जाती है। यह ठीक वैसे ही है जैसे पहाड़ों और घाटियों को चीरती कोई नदी, समतल पर आकर शांत और स्निग्ध हो जाती है।
अंत में, यह रूपक जीवन के उस क्षण से जुड़ता है जब उत्साह और उमंग से भरी नई नवेली दुल्हन, अपने ही आंगन में चुपचाप प्राजक्त के फूल-सी कोमलता के साथ ठहर जाती है और भीतर गहरी शांति महसूस करती है।

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