भारतीय साहित्य संकल्पना और वैश्विक प्रभाव पर मंथन
विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना, उज्जैन द्वारा मराठा मंदिर साहित्य शाखा, मुंबई एवं विश्व हिन्दी प्रचार प्रसार संस्थान, पुणे के सहयोग से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संचेतना महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर “भारतीय साहित्य : संकल्पना और वैश्विक प्रभाव” विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि श्री सुरेश चंद्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ (नॉर्वे) और मुख्य वक्ता प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा (उज्जैन) सहित देश-विदेश के अनेक विद्वानों ने भाग लिया। संगोष्ठी में भारतीय साहित्य की वैश्विक भूमिका, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। शाम को हुए कवि सम्मेलन में भारत, अमेरिका और नॉर्वे के कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन साहित्यिक आदान-प्रदान, भारतीय विचारधारा और विश्व शांति के संदेश को समर्पित रहा।
ग्वालियर में गालव म्यूजिकल ग्रुप की सुरमई शाम
गालव म्यूजिकल ग्रुप द्वारा आयोजित सुरमई शाम का कार्यक्रम इस माह भी बाल भवन में बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुआ। हर बार की तरह इस बार भी कार्यक्रम में आम जनता की पसंद के नगमों की प्रस्तुतियां दी गईं, जिससे श्रोता झूम उठे। कार्यक्रम का संचालन आशी, प्रतिभा दुबे और वर्षा श्रीवास्तव ने किया।
सुरों में विनम्रता, स्वर में विरासत
राहुल देशपांडे के सुमधुर राग चंद्रकंस गायन के साथ पुणे के वसंतोत्सव का भावपूर्ण समापन हुआ। शास्त्रीय संगीत की परंपरा, विनम्रता और भविष्य का सुर-संदेश इस मंच से गूंजा।
महाकाल लोक में फोगिंग से राहत, गर्मी में भक्तों को ठंडक
उज्जैन के महाकाल लोक में गर्मी से राहत देने के लिए पहली बार फोगिंग सिस्टम शुरू किया गया है। 900 मीटर पैदल मार्ग पर किए गए इस डेमो से श्रद्धालुओं को ठंडी फुहारों का अनुभव मिल रहा है।
एवाॅन एन्क्लेव में क्रिकेट का रोमांच
मुंबई के बोरीवली स्थित एवाॅन एन्क्लेव में आयोजित एक दिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट में ‘हैट-6-वाइपर्स’ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। यूथ क्लब द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में महिला खिलाड़ियों की सक्रिय भागीदारी और सभी आयु वर्ग के खिलाड़ियों के उत्साह ने इसे यादगार बना दिया।
योग करो, स्वस्थ रहो
योग करो, स्वस्थ रहो” एक प्रेरणादायक कविता है जो योग के महत्व, स्वस्थ जीवन, मानसिक शांति और निरोग भारत के संदेश को सरल एवं प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत करती है। यह कविता सभी को दैनिक जीवन में योग अपनाने और स्वस्थ समाज के निर्माण का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करती है।
“नारी की गरिमा”
“नारी की गरिमा” कविता स्त्री के सम्मान, सुरक्षा और न्याय के मुद्दों पर समाज से तीखे प्रश्न करती है। यह रचना महिलाओं के प्रति भेदभाव, अपराध और सामाजिक विसंगतियों को उजागर करते हुए आत्मसम्मान और समानता की आवाज़ बुलंद करती है।
शब वही लेकिन नज़ारा और है
यह ग़ज़ल जीवन के बदलते नजरिए, रिश्तों के इशारों और समाज में छिपे मुखौटों को बेहद सधी हुई भाषा में उजागर करती है।
तुम क्या जानो…
तुम प्रेम को अधिकार और जीत मानते रहे, जबकि मेरे लिए यह समर्पण और खामोशी रहा। हर औरत में कहीं न कहीं एक मीरा होती है, जो बिना प्रतिदान की आशा प्रेम करती चली जाती है। हर युग में प्रेम तुमने जीता है, और हमने उसे जिया है—उस दर्द, विरह और त्याग के साथ।
