किसको ढोओगे

यह कविता सत्ता के अहंकार, चुनावी राजनीति और सामाजिक विभाजन पर तीखे सवाल खड़े करती है। “किसको ढोओगे” आम जनता की आवाज़ बनकर लोकतंत्र के मूल्यों की याद दिलाती है।

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विश्व पुस्तक मेले में उज्जैन की गूंज: ‘व्यंग्य के रंग’ में शामिल डॉ. हरीशकुमार सिंह

राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित व्यंग्य संकलन ‘व्यंग्य के रंग’ में उज्जैन के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हरीशकुमार सिंह की रचना का चयन शहर के लिए गौरव का विषय बना।

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पहली यादों और भावनाओं को दर्शाता भावुक दृश्य

पहली बात… जो हर पल आती है याद…

जीवन के हर पहले अनुभव ख़ुशी हो या पीड़ा हमारी स्मृतियों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। यह लेख उन्हीं अमिट यादों की भावनात्मक यात्रा है।

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आध्यात्मिक जागरण और बसंत ऋतु का प्रतीकात्मक दृश्य

बसंत के रंग

बसंत ऋतु बाह्य सौंदर्य से आगे बढ़कर आत्मा के जागरण का संदेश देती है। यह लेख ईश्वर-स्मरण, विरह-साधना और आत्मिक प्रकाश के माध्यम से आंतरिक बसंत की अनुभूति कराता है।

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वीर-रस की प्रेरणादायक हिंदी कविता का प्रतीकात्मक दृश्य

कायरों की भांति बैठना नहीं

कायरता को त्याग कर निर्भय संघर्ष का आह्वान करती यह कविता मनुष्य को लक्ष्य, धैर्य और कर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देती है। वीर-रस का प्रभावशाली घोष।

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अधूरी रजाइयाँ

बारह साल की शादी के बाद भी घर में बच्चे की किलकारी नहीं गूँजी थी. हरमन और परमिंदर के बीच रिश्ते की खामोशी धीरे-धीरे आदत बन चुकी थी. बेरोज़गारी, बेबसी और अधूरेपन के बीच हरमन की माँ अपनी सुई से रजाइयाँ सीती रही—हर टाँके में एक टूटी हुई उम्मीद पिरोती हुई.
परमिंदर ने हालात से लड़ने की कोशिश की, मगर समाज की नजरें और रिश्तों की उलझनें उसे उस मोड़ पर ले आईं, जहाँ सही और गलत के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है. जब एक बच्ची जन्मी, तो सच सब जानते थे, पर खामोशी ने ही इज़्ज़त का कंबल ओढ़ लिया.

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संघर्ष और दृढ़ संकल्प से निखरती स्त्री को दर्शाती यथार्थवादी तस्वीर

सबसे खूबसूरत स्त्री

सबसे खूबसूरत स्त्री” एक सशक्त कविता है जो स्त्री के सौंदर्य को संघर्ष, दृढ़ संकल्प और अदम्य जिजीविषा के रूप में परिभाषित करती है। यह कविता स्त्री की मौन शक्ति और आत्मबल को स्वर देती है।

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बेटी की सफलता और माँ के समर्थन को दर्शाती प्रेरणादायक लघुकथा का दृश्य

सौ सुनार की, एक लोहार की

सौ सुनार की, एक लोहार की!” एक प्रेरणादायक लघुकथा है, जिसमें एक माँ अपनी बेटी के सपनों के साथ खड़ी होती है और बेटी अपनी मेहनत से समाज की सोच को करारा जवाब देती है।

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