बच्चों को खुद चुनने दीजिए उनका सुर
एक पिता ने अपने बेटे को ज़बरदस्ती शास्त्रीय संगीत की कक्षा में भेज दिया, जबकि बच्चे को संगीत में कोई दिलचस्पी नहीं थी। यह लेख बताता है कि कैसे माता-पिता अपने अधूरे सपनों को बच्चों पर थोपते हैं और क्यों यह ज़रूरी है कि हर व्यक्ति—चाहे किसी भी उम्र का हो—अपने ही सपनों को पूरा करने का प्रयास करे। बच्चों को उनकी पसंद का रास्ता चुनने देना ही सच्ची परवरिश है।