वास्तु अनुसार घर में पोछा लगाती महिला

पोछा नहीं, ऊर्जा-संस्कार

वास्तु के अनुसार पोछा लगाना केवल सफाई नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा को संतुलित करने का संस्कार है। सही दिशा, सही समय और एक छोटे उपाय से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

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खिड़की के पास अकेली बैठी एक भारतीय महिला, चेहरे पर गहरी उदासी और आंखों में छलकता दर्द. कमरे में हल्की रोशनी और पृष्ठभूमि में धुंधली होती एक पुरुष आकृति, जो दूरी और रिश्ते के टूटने का प्रतीक है. दृश्य भावनात्मक पीड़ा, विश्वासघात और मानसिक अकेलेपन को यथार्थ रूप में दर्शाता है.

कुछ पुरुष ऐसे भी होते हैं

कुछ पुरुष रिश्ते बड़ी आसानी से बनाते हैं और उतनी ही सहजता से तोड़ भी देते हैं. बिना किसी स्पष्टीकरण, बिना किसी टकराव के वे चुप्पी को हथियार बनाकर स्त्री को खुद ही रिश्ते से बाहर निकलने को विवश कर देते हैं. यह लेख उसी मौन छल, टूटते विश्वास और उस स्त्री की मानसिक पीड़ा की कहानी है, जो प्रेम को ईश्वर मान बैठती है और अंत में स्वयं को ठगा हुआ पाती है.

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जब आता था कलाई करने वाला: पीतल के बर्तनों की यादें”

महिदपुर रोड की गलियों में, कलाई करने वाला अपनी भट्टी और चमकीले पीतल के बर्तनों के साथ आता था। तपेली, डेकची और लोटे—हर बर्तन उसकी कला की छाप लिए होते थे। बच्चों की जिज्ञासा, धुएँ की हल्की गंध और भट्टी की आंच—सब कुछ बचपन की यादों में अमिट छाप छोड़ गया। यह केवल बर्तनों की कहानी नहीं, बल्कि उस समय की जीवनशैली, रिश्तों और परंपरा की सजीव झलक है।

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“मन की देहरी: संवेदनाओं का प्रवेशद्वार”

“‘मन की देहरी’ एक ऐसा काव्य संग्रह है जो पाठक को भीतर तक छू जाता है। पूनम सिंह जी की सरल और भावपूर्ण कविताएँ प्रेम, स्मृति और स्त्री-मन की गहराई को उजागर करती हैं। प्रत्येक पंक्ति जैसे पाठक के अपने अनुभवों का प्रतिबिंब है। एक पुस्तक जो संवेदनाओं और आत्मिक प्रेम का संसार खोलती है।”

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तुम्हारे चश्मे और मेरी हसरतें…

तुम्हारी उन काजलभरी आँखों पर जब तुम चश्मा लगाती हो न…मुझे लगता है, हमारे बीच एक काँच की दीवार खड़ी हो जाती है।मैं चाहता हूँ इन आँखों में अपना अक्स साफ़ उतरते देखूँ,और ख़ुद पर रश्क कर सकूँ।

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रास आई न तन्हा है ये ज़िंदगी

ज़िंदगी तन्हा लगती है जब तक कोई साथी नहीं होता। चाहे कितनी भी भक्ति कर लो या चारों ओर दुनिया की दौड़-धूप हो, दिल को सुकून केवल किसी प्रिय के साथ से मिलता है। तन्हाई चारों ओर हो तो हर खुशी अधूरी लगती है, और सिर्फ एक साथी के होने से ही जीवन में हल्की मुस्कान और राहत महसूस होती है। जीवन की सच्ची सुंदरता तब उजागर होती है जब कोई पास हो, बातों में मुस्कान बिखेरता हो और हर ग़म को कम कर देता हो। यही सरल, पर अनमोल एहसास है — एक साथी का होना ही जीवन को पूरा बनाता है।

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बीड़-अमलनेर नई रेल लाइन का लोकार्पण

 महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री  देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री तथा बीड़ के पालकमंत्री  अजित पवार ने आज बीड़ जिले को बड़ी सौगात देते हुए अमलनेर (बी) – बीड़ नई रेल लाइन का लोकार्पण किया तथा बीड़ से अहिल्यानगर के लिए उद्घाटन विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर  पर्यावरण एवं जलवायु परवर्तन तथा पशुसंवर्धन मंत्री श्रीमती पंकजा मुंडे, राज्यसभा सांसद   राजनी पाटिल  लोकसभा सांसद  बजरंग सोनवणे, केंद्रीय रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे। यह समारोह बीड़ रेलवे स्टेशन पर भव्य रूप से संपन्न हुआ।

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माँ का पीतल का संदूक

माँ का पीतल का संदूक—छोटा, पर सोने-सा चमकता। उसमें सहेजे गए गहने, सिक्के, पान और यादें पीढ़ियों की परंपरा और स्नेह का दीप हैं। बचपन से मुझे खींचने वाला यह संदूक अब मेरी नई यादों और ज्वेलरी का घर बन गया है।

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पिंक फ्रॉक

पिंकी की ज़िद नई पिंक फ्रॉक की थी, लेकिन जब उसने अपनी सहेली मुन्नी को फटे-पुराने कपड़ों में देखा तो उसका मन बदल गया। उसने अपनी सुंदर फ्रॉक मुन्नी को दे दी। उस पल उसे समझ आया कि असली खुशी पाने में नहीं, बाँटने में है।

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पितरों की तस्वीर: कहाँ और कैसे लगाएं

घर में पितरों की तस्वीर लगाने का उद्देश्य सिर्फ स्मरण करना नहीं, बल्कि वास्तुशास्त्र के अनुसार सही दिशा और स्थान पर रखकर घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना है। गलत स्थान या दिशा पर तस्वीर लगाने से वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। इसलिए पितरों की तस्वीर को उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में, दक्षिण की ओर मुख करके रखना सर्वोत्तम माना जाता है।

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