प्रथम मिलन प्रिय प्रथम मास का, दिया चैत्र नवल सौगात।
चंचल चपल चैत्र का साथी, तकती बिरहन सजल पात।।
निर्मोही बैसाख उष्ण हुआ, तापक तन मन झुलसाए।
प्रीत, स्नेह का रिश्ता जोड़े, जेठ मंगल पवन गाए।।
ऋतु वर्षा धुआंधार आषाढ़, ताल नदी गहरी जाए।
आया सावन झूला डाले, व्याकुल हृद कजरी गाए ।।
रूप भयावह घन भय भादो, चन्द्र दरस को नैना तरसे।
मन को मोहे अश्विन अनुपम, सकल कास, रैना हरसे।।
भक्त भानु दे प्रातः जल अर्पण, शुभारंभ कार्तिक पावन।
आँगन घर अगहन भर जाए, अन्न धान आर्थिक आवन।।
कंपकंपाता पूस कनकन, सूरज रंगत दिखलाए।
ऋतुराज आए माघ वसंत, धानी भू संगत पाए।।
रंग बिरंगा फागुन मासा, कुसुमित कलश धवल प्रभात।
चंचल चपल चैत्र का साथी, तकती बिरहन सजल पात।।

निवेदिता श्रीवास्तव, प्रसिद्ध लेखिका, जमशेदपुर