सेवा ही सबसे बड़ी साधना

महिदपुर रोड के एक मंदिर परिसर में संतोष विश्वकर्मा श्रद्धालुओं के साथ खड़े, पारंपरिक परिधान में, सेवा और समर्पण का प्रतीक दृश्य टेम्पल मैन संतोष विश्वकर्मा

समाज को जोड़ने वाले मंदिर और उनके समर्पित प्रहरी संतोष विश्वकर्मा

सुरेश परिहार, एडिटर लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

धर्म और आस्था से जुड़ा हर कार्य तब सफल होता है, जब उसमें निस्वार्थ सेवा और समर्पण का भाव हो. महिदपुर रोड के प्रसिद्ध समाजसेवी संतोष विश्वकर्मा (भूरा सेठ) इसी भावना के प्रतीक हैं. अपनी गहरी धार्मिक आस्था और निरंतर सेवाभाव के कारण लोग उन्हें टेम्पल मैनः के नाम से पुकारते हैं.


मंदिर और समाज के लिए समर्पित जीवन
संतोष विश्वकर्मा ने गांव और आसपास के अनेक प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार का कार्य किया है. केवल सहयोग ही नहीं, वे स्वयं तन-मन-धन से इसमें सहभागी रहते हैं. गणेश मंदिर, शीतला माता मंदिर, शनि मंदिर और साईं मंदिर सहित कई मंदिरों के विकास में उनका योगदान रहा है. पोस्ट ऑफिस चौराहा स्थित दुर्गा माता मंदिर से उनका विशेष लगाव है. यहां वे वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं. समिति के प्रमुख सदस्य होते हुए भी वे हमेशा विनम्र बने रहते हैं. उनका मानना है कि मंदिर केवल ईश्वर की उपासना का स्थल नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला केंद्र भी है.


भक्ति का पर्व- नवरात्रि और कांवड़ यात्रा

हर वर्ष आयोजित होने वाला नवदुर्गा महोत्सव संतोष विश्वकर्मा की सक्रियता और सेवा भाव का अद्भुत उदाहरण है. नौ दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में उनकी पूरी टीम परिवार की तरह जुटी रहती है. घटस्थापना से लेकर महाभंडारे तक, सब कुछ बिना किसी प्रसिद्धि की चाह के संपन्न होता है.
श्रावण मास में आयोजित कांवड़ यात्रा और महिदपुर रोड से चित्तौड़गढ़ स्थित सांवरिया सेठ मंदिर तक की पैदल यात्रा में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. इस एक सप्ताह की यात्रा में 150 से अधिक श्रद्धालु शामिल होते हैं और पूरा व्यय वे स्वयं वहन करते हैं. किंतु उनकी विनम्रता देखिएजब कोई पूछे, तो बस इतना कहते हैं
मैं कौन करने वाला… कराने वाले तो सांवरिया सेठ हैं


सेवा की विरासत
संतोष विश्वकर्मा मूल रूप से होटल व्यवसायी हैं, परंतु उनका जीवन केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं. समाज और धर्म की सेवा उनके लिए प्रथम व्रत है. उनके पिता बालकृष्ण विश्वकर्मा भी समाजसेवी रहे हैं. इस पारिवारिक संस्कार ने ही संतोष जी को सेवाभाव की प्रेरणा दी.


प्रेरणा का संदेश
आज जब लोग व्यक्तिगत लाभ की ओर अधिक झुकते जा रहे हैं, ऐसे समय में संतोष विश्वकर्मा की निस्वार्थ सेवा समाज के लिए प्रेरणा है. उनकी विनम्रता, श्रद्धा और आस्था यह संदेश देती है कि धर्म और समाज की सेवा से बड़ा कोई कार्य नहीं.

12 thoughts on “सेवा ही सबसे बड़ी साधना

  1. बहुत सुंदर। मैं खुद कई वर्षों से उनकी इस निस्वार्थ सेवा का साक्षी रहा हूं।

    1. माता रानी का आशीर्वाद बाबा श्याम का आशीर्वाद श्री सांवरिया सेठ जी का आशीर्वाद बड़े भईया संतोष जी विश्वकर्मा पर सदैव बना रहे ओर भगवान जी उनकी सारी इच्छा पूरी करे 🙏

    1. आभार-अभिनंदन, आप
      इसी तरह उत्साहवर्धन करते रहें
      -सुरेश परिहार, एडिटर, लाइव वॉयर न्यूज

  2. मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि समाज के लोगों के जुड़ने का भी जरिया है। सही लिखा आपने संपादक जी।

    1. आभार-अभिनंदन, आप
      इसी तरह उत्साहवर्धन करते रहें
      -सुरेश परिहार, एडिटर, लाइव वॉयर न्यूज

  3. प्रबिसि नगर किजे सब काजा
    हृदय राखी कौसलपुर राजा

    1. आभार-अभिनंदन, आप
      इसी तरह उत्साहवर्धन करते रहें
      -सुरेश परिहार, एडिटर, लाइव वॉयर न्यूज

      1. जय हो भूरा सेठ मामा जी माता रानी का आशीर्वाद सदैव बना रहे यही कामना है।

  4. धार्मिक कार्यों में चोर शोर से अपनी सेवा ओर योगदान देने वाले संतोष विश्वकर्मा जी का बहुत बहुत आभार आप इसी प्रकार सब पर अपना स्नेह बनाएं रखे । आप पर ओर आपके पूरे परिवार पर श्री सांवलिया सेठ ओर माता रानी का आशीर्वाद बना रहे।
    पुनः बहुत बहुत धन्यवाद आपका इस सेवा के लिए 🙏🙏

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