मेरी अर्थी पर फिर मत आना
यह कविता उस दर्द को बयां करती है, जब कोई अपना जीते-जी साथ नहीं देता, लेकिन बाद में दिखावे की मोहब्बत लेकर लौटता है।

यह कविता उस दर्द को बयां करती है, जब कोई अपना जीते-जी साथ नहीं देता, लेकिन बाद में दिखावे की मोहब्बत लेकर लौटता है।
“कुछ रिश्ते होते हैं, जो बिना नाम के भी ज़िंदा रहते हैं। न वे समाज से मान्यता चाहते हैं, न किसी वादे की ज़रूरत होती है। बस एक मौन जुड़ाव होता है—जिसमें न कोई अधिकार होता है, न अपेक्षा। चितरा और सत्य का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही था—जहां भावनाएं थीं, गहराई थी, पर कोई दावा नहीं था। यह प्यार था, लेकिन ऐसा प्यार जो छूने से पहले ही समझ जाता है, जो मिलने से पहले ही विदा ले लेता है। एक ऐसा रिश्ता जिसे शब्द नहीं बाँध सकते, पर आत्मा पहचान लेती है।”
जिन सराफा व्यापारियों ने दशकों पहले अपने ओटले किराए पर देकर सराफा चौपाटी के दुकानदारों को कंधे पर बैठाया आखिर वही क्यों अब उन्हें यहां से भगाने पर आमादा हो गए। कुछ सालों में बने इस हालात की एक बड़ी वजह है सिगड़ी के सम्मान को भूल कर चौपाटी की दुकानों में गैस भट्टी का मोह बढ़ता जाना ।
संकरी गलियों वाले सराफा क्षेत्र में चाट-व्यंजन की इन दुकानों का इतिहास करीब नौ दशक पुराना है। तब चौपाटी के दुकानदार खानपान की सामग्री घर से ही बना कर लाते थे और इस खाद्य सामग्री को गर्म रखने के लिए कोयले वाली सिगड़ियों का इस्तेमाल करते थे
सूखी धरती मेघों को पुकार रही है. प्यासे खेत, तड़पते किसान और तपन से झुलसी दुनिया बादलों से जीवन-वर्षा की विनती करती हुई।
आज मोहब्बत के तौर-तरीके बदल चुके हैं। अब प्रेम चिट्ठियों में नहीं, बल्कि मोबाइल की स्क्रीन पर लिखे मैसेज और इमोजी में छुपे दिल के संदेशों में दिखाई देता है। कभी व्हाट्सएप कॉल से मुलाक़ात शुरू होती है तो कभी वीडियो चैट में जज़्बात उमड़ते हैं।
जहाँ पहले चाँद-तारों की बातें होती थीं, वहीं अब ऑनलाइन स्टेटस ही बहुत कुछ कह जाता है। “टाइपिंग…” का छोटा-सा शब्द भी दिल की धड़कनों को तेज़ कर देता है और चैट बॉक्स ही दिल के हालात का दर्पण बन जाता है।
सेल्फ़ी में मुस्कान, फिल्टर का जादू और रील्स में झलकता इश्क़ आज के रिश्तों की पहचान बन चुके हैं। कभी स्वाइप लेफ़्ट, कभी स्वाइप राइट — यही है मोहब्बत का नया डिजिटल अंदाज़।
फिर भी सच्चाई यही है कि दिल आज भी वैसा ही है जैसा पहले था। जिसे चाहा वही सबसे क़ीमती खजाना है। तकनीक और साधन बदल गए, तौर-तरीके बदल गए, पर प्यार का जादू आज भी उतना ही पुराना और उतना ही सुहाना है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री तथा बीड़ के पालकमंत्री अजित पवार ने आज बीड़ जिले को बड़ी सौगात देते हुए अमलनेर (बी) – बीड़ नई रेल लाइन का लोकार्पण किया तथा बीड़ से अहिल्यानगर के लिए उद्घाटन विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर पर्यावरण एवं जलवायु परवर्तन तथा पशुसंवर्धन मंत्री श्रीमती पंकजा मुंडे, राज्यसभा सांसद राजनी पाटिल लोकसभा सांसद बजरंग सोनवणे, केंद्रीय रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे। यह समारोह बीड़ रेलवे स्टेशन पर भव्य रूप से संपन्न हुआ।
घर जाने का नाम आते ही उसके भीतर एक अजीब-सा डर जाग उठता है। डर किसी अनजान रास्ते का नहीं, बल्कि एक बहुत परिचित सवाल का है—
“क्या करते हो आजकल?”यही सवाल उसकी हिम्मत तोड़ देता है। यही वजह है कि वह एक और त्योहार भी अपने छोटे से कमरे में बिताने को मजबूर हो जाता है।उसके चारों ओर बिखरी रहती हैं कुछ पुरानी किताबें, कुछ बर्तन, मेज़ पर रखा टेबल लैंप और कोनों में धुंधले पड़ते सपनों की परछाइयाँ। इन्हीं सबके बीच वह सोचता है कि क्या उसे एक और साल की मोहलत खुद को देनी चाहिए या फिर चुपचाप उन सपनों को यहीं छोड़ देना चाहिए।
केदारनाथ यात्रा के बाद आत्मा जैसे हिमालय की ओर फिर खिंच गई थी। 9 जुलाई 2024 को नागदा से शुरू हुई हमारी अमरनाथ यात्रा भक्ति, रोमांच और व्यवस्था से भरी रही। जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप तक का सफर, यात्रा कार्ड बनवाने की प्रक्रिया और सेवाभाव से परिपूर्ण भंडारे—हर क्षण अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
भारतीय संस्कृति में प्रेम का सर्वोच्च रूप राधा और कृष्ण के संबंध में मूर्त होता है। राधाष्टमी का पर्व केवल राधा के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि उस शाश्वत प्रेम का प्रतीक है, जिसमें आत्मा और परमात्मा का संगम झलकता है। राधा का व्यक्तित्व केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण और आत्मविस्मृति का प्रतीक है। साहित्य में सूरदास, रसखान, बिहारी, जयदेव और नन्ददास जैसे कवियों ने राधा-कृष्ण प्रेम को लौकिक से परे जाकर अध्यात्म से जोड़ा है। राधा का प्रेम मिलन में ही नहीं, बल्कि विरह में भी पूर्ण है। यही निष्काम समर्पण उन्हें भक्ति का शिखर बनाता है। आज के समय में राधा-कृष्ण का प्रेम हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम अधिकार नहीं, बल्कि अर्पण से जीवित रहता है। राधाष्टमी का संदेश है—प्रेम को भौतिकता से ऊपर उठाकर जीवन को आध्यात्मिक सौंदर्य से भरना।
कुछ रिश्ते डोरियों से नहीं, आत्मा के एहसासों से बंधे होते हैं। “धागों से परे” एक ऐसी मार्मिक कहानी है, जिसमें कठपुतलियाँ प्रेम, बिछड़न और मुक्ति का प्रतीक बन जाती हैं।