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पर्स में रखा दिल रोमांटिक हिंदी गद्य अहसास

जब दिल बोले…यहीं ठीक हूँ

उनके पर्स के किसी कोने में मेरा दिल रखा है—मेकअप की चीज़ों से घिरा हुआ। दिल कभी शिकायत करता है, कभी जिद करता है कि उसे वहीं रहने दो। वजह बड़ी मासूम है जब भी वह पर्स खोलती हैं, उनकी उँगलियों का स्पर्श दिल को ऐसा सुकून देता है कि सारी चुभन भूल जाती है। दिल मानता है कि सबसे महफ़ूज़ और मीठी जगह वही है, जहाँ अहसास बिना बोले छू लेते हैं।

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इंदौर में साहित्यिक सम्मान प्राप्त करती कवयित्री, ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन की आध्यात्मिक यात्रा

शब्दों की साधना, शिव की आराधना

साहित्यिक सम्मान, ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन तथा इंदौर की सांस्कृतिक समृद्धि से सजी यह यात्रा मेरे जीवन की सबसे यादगार आध्यात्मिक और साहित्यिक उपलब्धियों में से एक बन गई।

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पितरों की तस्वीर: कहाँ और कैसे लगाएं

घर में पितरों की तस्वीर लगाने का उद्देश्य सिर्फ स्मरण करना नहीं, बल्कि वास्तुशास्त्र के अनुसार सही दिशा और स्थान पर रखकर घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना है। गलत स्थान या दिशा पर तस्वीर लगाने से वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। इसलिए पितरों की तस्वीर को उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में, दक्षिण की ओर मुख करके रखना सर्वोत्तम माना जाता है।

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हिंदी में हँसी, हिंदी में प्यार

आज हिंदी दिवस पर सबको याद दिलाएँ – अंग्रेज़ी नहीं, अपनी प्यारी हिंदी बोलें! बात करें, हँसी-मज़ाक करें और इसे दिल से अपनाएँ। क्योंकि हिंदी है हमारी भाषा, हमारी पहचान।”

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अपने बच्चे को गोद में लेकर स्नेहपूर्वक लोरी सुनाती एक भारतीय माँ का भावनात्मक दृश्य।

माँ

माँ’ एक ऐसी भावपूर्ण हिंदी कविता है, जो माँ के निस्वार्थ प्रेम, त्याग, ममता और समर्पण को सरल शब्दों में चित्रित करती है। यह कविता बताती है कि माँ हर परिस्थिति में अपने परिवार की खुशियों को सबसे पहले रखती है और स्वयं का सुख भूल जाती है।

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असुंदर है

*“असुंदर है”* समाज के विकृत चेहरों को उजागर करने वाली रचना है। कवि ने इस कविता में बार-बार “असुंदर है” कहकर हमारे भीतर और हमारे समाज में फैली उन कुरूप सच्चाइयों की ओर ध्यान दिलाया है, जिन्हें हम सामान्य मानकर अनदेखा करते रहते हैं।
कवि कहता है कि असुंदर है जब मनुष्य, मनुष्य के साथ भेदभाव करता है — किसी को महान और किसी को तुच्छ समझता है। यह असुंदर है जब पुरुष को मोक्ष का अधिकारी माना जाता है और स्त्री को पैरों की जूती समझा जाता है। असुंदर है जब पत्थरों को ईश्वर कहा जाता है, लेकिन मनुष्यों के साथ पशुओं जैसा व्यवहार किया जाता है।
गाँव के बीच मंदिर बनाना और कुछ लोगों को गाँव के बाहर बसाना भी असुंदर है। पत्थरों की पूजा करते हुए उन्हीं पर पशुओं की बलि चढ़ाना और जाति-धर्म के नाम पर लोगों को बाँटकर आपस में लड़ाना भी असुंदर है।

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सूर्योदय की सुनहरी रोशनी में एक भारतीय माँ अपने वयस्क बच्चे के सिर पर स्नेहपूर्वक हाथ रखे खड़ी है। दोनों के चेहरे पर प्रेम, सम्मान और आत्मीयता झलक रही है। पृष्ठभूमि में हरे-भरे खेत, खिले हुए फूल और शांत आकाश दिखाई दे रहे हैं, जो मातृत्व, त्याग, संरक्षण और जीवन की प्रेरणा का प्रतीक हैं।

ममता सागर

माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, प्रेरणा और समर्पण का जीवंत स्वरूप है। यह भावपूर्ण कविता ईश्वर के सबसे अनमोल उपहार “माँ” के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करती है।

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केसी कॉलेज का इंटर कॉलेजिएट फेस्ट “किरण” 13 से

-किशनचंद चेल्लाराम (केसी) कॉलेज का प्रतिष्ठित इंटर कॉलेजिएट फेस्ट किरण सिर्फ एक फेस्ट नहीं रह गया है, बल्कि अपने समय की एक ऐसी उत्कृष्ट सांस्कृतिक प्रस्तुति बन चुका है, जिसे हर वर्ष विद्यार्थी, शिक्षक और प्रतिभागी लंबे समय तक याद रखते हैं. एन.एच.एस.आर.ई. की डायरेक्टर और एचएसएनसी यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर कर्नल प्रो. डॉ. हेमलता बागला ने कहा कि हर तरफ त्यौहारों का माहौल है,

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