gulmohar
खिड़की के पास बैठा लेखक, वैचारिक लेखन में डूबा हुआ दृश्य

ज्ञान नहीं, बदलाव लिखिए

लेखन का उद्देश्य केवल ज्ञान बाँटना नहीं, बल्कि स्वयं से शुरू होने वाला परिवर्तन होना चाहिए। जब लेखन आत्मचिंतन बनता है, तभी वह समाज को दिशा देता है।

Read More
कभी-कभी कोई दर्दनाक घटना सुनने भर से ही दिल काँप जाता है। पर जब ऐसा पता चलता है कि वह दर्द किसी ऐसे इंसान के साथ हुआ है जिसे हम रोज़ देखते थे, जिसके बच्चे हमारे सामने खेलते थे,

काली राख की बस्ती

कभी-कभी कोई दर्दनाक घटना सुनने भर से ही दिल काँप जाता है। पर जब ऐसा पता चलता है कि वह दर्द किसी ऐसे इंसान के साथ हुआ है जिसे हम रोज़ देखते थे, जिसके बच्चे हमारे सामने खेलते थे,

Read More
वर्षों की प्रतीक्षा और विरह में डूबी स्त्री को दर्शाती हिंदी कविता

प्रतीक्षा

वर्षों की प्रतीक्षा जब थकान में बदल जाती है, तो प्रेम के सामने दो ही रास्ते रह जाते हैं—अपना नाम वापस पा लेना या फिर विदा हो जाना। यह कविता उसी भावनात्मक संघर्ष और टूटते विश्वास की कहानी कहती है।

Read More

ईश्वर पर विश्वास

संपूर्ण हृदय से प्रभु पर भरोसा रखें और अपनी बुद्धि पर निर्भर न रहें। जीवन में चाहे सुख हो या दुख, भय और चिंता को त्यागकर ईश्वर की इच्छा में चलना ही सच्चा विश्वास है। प्रार्थना और समर्पण के माध्यम से हम आंतरिक शांति, स्थिरता और संतोष प्राप्त कर सकते हैं। ईश्वर पर भरोसा केवल आध्यात्मिक अनुभव नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक शक्ति भी देता है। जब हम अपनी चिंताओं को प्रार्थना में छोड़ देते हैं, तब हमारा बोझ हल्का होता है और हम जानते हैं कि हम अकेले नहीं हैं।

Read More

सिद्धार्थ पारधे : शून्य से शिखर तक

सिद्धार्थ पारधे का जीवन हमें सिखाता है कि अगर इरादे मजबूत हों और सही मार्गदर्शन मिले, तो इंसान फुटपाथ से उठकर महलों तक का सफर तय कर सकता है। उनकी विनम्रता, और जमीन से जुड़े रहने की भावना उन्हें बाकी सफल व्यक्तियों से अलग बनाती हैं। उनकी कहानी कंक्रीट के जंगल में संवेदनाओं की जीत की कहानी है।

Read More

बारह मासा 

“चैत्र की चपलता और बैसाख की तपिश से लेकर सावन की झूलों वाली हरियाली और भादो के घने बादलों तक, यह काव्य भारतीय मासों का रंगीन चित्र प्रस्तुत करता है। इसमें ऋतुओं के बदलते रंग, प्रकृति का सौंदर्य और ग्रामीण जीवन की सहज लय एक साथ बुनी गई है, जो पाठक को पूरे वर्ष के मौसम सफर पर ले जाती है।”

Read More
सूर्योदय की सुनहरी रोशनी में एक भारतीय माँ अपने वयस्क बच्चे के सिर पर स्नेहपूर्वक हाथ रखे खड़ी है। दोनों के चेहरे पर प्रेम, सम्मान और आत्मीयता झलक रही है। पृष्ठभूमि में हरे-भरे खेत, खिले हुए फूल और शांत आकाश दिखाई दे रहे हैं, जो मातृत्व, त्याग, संरक्षण और जीवन की प्रेरणा का प्रतीक हैं।

ममता सागर

माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, प्रेरणा और समर्पण का जीवंत स्वरूप है। यह भावपूर्ण कविता ईश्वर के सबसे अनमोल उपहार “माँ” के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करती है।

Read More

ऐसा होता तो कैसा होता…

कभी-कभी मन सोचता है अगर दुनिया हमारी इच्छाओं के हिसाब से चलती, तो कैसी होती?
शायद इतनी मीठी कि चॉकलेट, आइसक्रीम, बर्गर और पिज़्ज़ा खाकर भी जेब हल्की न होती।
शायद इतना आसान कि इतिहास और भूगोल की जगह कार्टून और गानों के इम्तिहान होते, जहाँ गलत जवाब देने पर भी मुस्कुराहट मिलती।
कल्पना की इस रंगीन दुनिया में हम हमेशा बच्चे रहते न चिंता, न बोझ, न कल की फिक्र।

Read More
तेते पाँव पसारिए जेती लंबी सौर कहावत पर आधारित संतोषपूर्ण जीवन

“तेते पाँव पसारिए, जेती लंबी सौर”

“तेते पाँव पसारिए, जेती लंबी सौर” केवल कहावत नहीं, बल्कि संतोष, आर्थिक समझदारी और दिखावे से दूर रहकर सुखी जीवन जीने का मार्गदर्शन है।

Read More