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दिलों को जोड़ती, नफरतों को तोड़ती हिंदी

हिंदी अपनी निर्बाध गति से आगे बढ़ती है और लोगों के दिलों को जोड़ती है। यह हिंदुस्तान का हृदय बनकर अपनी सरल और सहज चाल से सबको साथ लेती है। हिंदी संस्कृतियों के बीच पुल बनाती है और वर्जनाओं को तोड़ती है। यह सुहृदयजनों के भावों को अपनी ओर मोड़ती है और परंपराओं को तोड़कर नई परंपराएं बनाती है। हिंदी राम-रहीम और कृष्ण-करीम जैसी एकता को सामने लाती है, बंटी-बबली जैसी कहानियों को अपनाती है और अनेक भाषाओं के दरिया को अपनी ओर मोड़ती है। यह पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण से दिलों को जोड़ती है, प्रेम और इंसानियत को बढ़ाती है और नफरतों को दूर करती है।

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भारतीय शादी का पारंपरिक मंडप और अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त में विवाह समारोह

खरमास समाप्त, अब शुरू होंगे मांगलिक कार्यों के शुभ दिन

खरमास की समाप्ति के साथ 14 अप्रैल से मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी. इस बार 20 अप्रैल की अक्षय तृतीया सबसे खास मानी जा रही है, जिसे अबूझ मुहूर्त के रूप में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है.

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मध्य रेल मुंबई मंडल पर 21 दिसंबर को मेगा ब्लॉक

मध्य रेल के मुंबई मंडल पर रविवार 21 दिसंबर 2025 को इंजीनियरिंग और रखरखाव कार्यों के चलते मेगा ब्लॉक रहेगा. ठाणे–कल्याण मेन लाइन, हार्बर और ट्रांस हार्बर लाइनों पर लोकल, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की सेवाएं प्रभावित होंगी. यात्रियों से वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने और सहयोग करने की अपील की गई है.

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खिड़की के पास बैठा व्यक्ति, मन की थकान और अकेलेपन को दर्शाता दृश्य

“मन थके तो कौन?”

मन की थकान वह पीड़ा है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता। “मन थके तो कौन?” कविता इसी अदृश्य दर्द को उजागर करती है, जहाँ तन की बीमारी का इलाज तो मिल जाता है, लेकिन मन के घाव केवल एक सच्चे अपने की उपस्थिति से ही भरते हैं। यह कविता हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी सबसे बड़ा सहारा सिर्फ सुनने वाला एक दिल होता है।

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मोहब्बत में बिछड़न और तन्हाई का दर्द व्यक्त करती हिंदी कविता 'मोहब्बतें'

मोहब्बतें

“मोहब्बतें” प्रेम की उन अनकही भावनाओं की कविता है, जहाँ इबादत, आदत, तन्हाई और बिछड़न एक-दूसरे में घुल जाते हैं। यह रचना अधूरे रिश्तों की टीस, यादों की क़यामत और दिल में दबी शिकायतों को बेहद संवेदनशील और मार्मिक शब्दों में अभिव्यक्त करती है।

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प्रकृति के बीच अकेली स्त्री, घास पर बैठी आसमान की ओर देखती हुई, आत्मचिंतन का शांत दृश्य

फिर कभी न लौटने के लिए…

“फिर कभी न लौटने के लिए…” एक गहन भावनात्मक और दार्शनिक कविता है, जिसमें कवयित्री तन्हाई, प्रकृति और आत्म-अन्वेषण के माध्यम से जीवन के गूढ़ प्रश्नों को समझने की कोशिश करती है। यह कविता आत्मा की शांति और अस्तित्व की खोज का संवेदनशील चित्रण है।

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एक-दूसरे का हाथ थामे भावनात्मक जुड़ाव दर्शाता युवा जोड़ा.

हर उम्मीद एक्सपेक्टेशन नहीं होती

हर चाहत स्वार्थ नहीं होती और हर उम्मीद एक्सपेक्टेशन नहीं होती. किसी रिश्ते में समय, अपनापन और सम्मान की चाह रखना स्वाभाविक है. जानिए क्यों मजबूत रिश्तों के लिए दोनों तरफ से प्रेम और प्रयास जरूरी हैं.

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Softly lit close-up of two Indian hands gently reaching toward each other without touching, expressing emotional connection, trust, and respectful intimacy in a calm, warm-toned setting.

स्पर्श : संवेदना का संगीत

कुछ स्पर्श शरीर को नहीं, मन को छूते हैं। वे न वासना जगाते हैं, न भय बस भीतर कहीं भरोसे की लौ जला देते हैं। मर्यादा में बंधे ऐसे स्पर्श रिश्तों को शब्दों से पहले समझा देते हैं और इंसान को इंसान होने का एहसास कराते हैं।

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उगते सूरज की रोशनी में मुस्कुराते युवा, जो सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सफलता का प्रतीक हैं।

मुस्कान: जीवन का सबसे सुंदर आभूषण

मुस्कान जीवन की वह अनमोल शक्ति है जो कठिन परिस्थितियों में भी आशा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार करती है। युवाओं के लिए यह सफलता की यात्रा का सबसे मजबूत साथी है।

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स्त्री का दर्द और समाज की सच्चाई

“स्त्री जब प्रेम में छल खाती है या विवाह में अपमान सहती है, तब उसकी संवेदना टूटी हुई कांच की तरह बिखर जाती है। ममता और त्याग की प्रतिमूर्ति होकर भी वह अधूरी कहानी लिखने पर विवश होती है। कभी अपने बच्चों की गलत परवरिश का दोष भी उसी पर आता है, तो कभी परिवार के विघटन का बोझ भी उसके कंधों पर डाल दिया जाता है। यदि नारी नफ़रतों के बीज बोना छोड़ दे और पुरुष अन्याय पर अपनी सहमति न दे, तभी प्रेम का प्रकाश फैलेगा और समाज में करुणा का पुनर्जन्म होगा। जिस दिन प्रेम हर हृदय में विस्तारित होगा, उस दिन नारी सचमुच लक्ष्मी स्वरूपा बनकर पूजी जाएगी।

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