प्रभु दर्शन की चाह में तड़पती आत्मा आकांक्षा कविता

आकांक्षा

“आकांक्षा” एक संवेदनशील भक्ति कविता है, जिसमें एक भक्त की प्रभु के साक्षात दर्शन पाने की गहरी तड़प और आत्मिक संवाद को बेहद मार्मिक शब्दों में व्यक्त किया गया है.

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सुबह की रोशनी में लकड़ी की मेज पर रखा गर्म चाय का कप, हल्की भाप उठती हुई, पास में चाय की पत्तियां और शांत वातावरण

चाय: एक कप में सेहत, सुकून और लंबी उम्र का राज

चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि सेहत और सुकून का मेल है. सही समय, सही तापमान और सही मात्रा में पी गई चाय दिल, मेटाबॉलिज़्म और इम्युनिटी को मजबूत बनाती है, जबकि गलत आदतें इसके फायदे को नुकसान में बदल सकती हैं. यह लेख बताता है चाय पीने का वैज्ञानिक और स्वास्थ्यवर्धक तरीका.

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घर…

मैंने अपना घर किसी ईंट-पत्थर की दीवारों पर नहीं, बल्कि एक मधुर, दर्दभरी और सुरीली तान पर बनाया है। यह महज़ चार दीवारें और एक छत नहीं, बल्कि ऐसा स्थान है जहाँ भोर से लेकर संध्या और संध्या से रात तक संगीत बहता है। यहाँ संवाद की स्वतंत्रता है, त्याग और समर्पण का अहसास है, और रिश्तों के मौन बंधन भी। इस घर में पंछियों की चहचहाहट, पेड़ों की हरियाली, तितलियों के रंग और मिट्टी की गंध बसी है। यहाँ प्राणवायु संचार करती है और नादब्रह्म विचरता है। यह रंगों और सुगंधों से भरा, मिट्टी और खुले आसमान से जुड़ा एक निरामय संसार है।

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सरस्वती वन्दना

यह कविता एक साधिका की अंतरतम पुकार है, जिसमें वह माँ से प्रार्थना करती है कि उसका अंतर्मन शुद्ध, निर्मल और विकारों से रहित हो जाए। वह चाहती है कि उसका प्रत्येक श्वास एक श्रद्धा से भरा पूजन बन जाए, और उसका मन ऐसा हो जैसे मुस्काता हुआ वृंदावन। कविता में भक्ति का भाव सहज रूप से बहता है — कभी वह मन की वीणा पर माँ की महिमा का गीत गाना चाहती है, तो कभी बनमाली को खोजती हुई नंदनवन की ओर बढ़ती है।
कवयित्री अपने जीवन में अवरोधों को दूर कर विश्वास की गली में ‘निवी’ नामक दीप जलाकर गतिमान बनने की आकांक्षा रखती है। यह रचना केवल भक्ति नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और चेतना के उजास की ओर यात्रा है।

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मन की बात

डिजिटल मीडिया के माध्यम से केवल प्रेरक कहानियाँ प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि उन अनसुने हीरों, संस्थाओं और व्यक्तियों को सामने लाना है जो लाइमलाइट से दूर रहकर अपने कार्य से बदलाव ला रहे हैं। पाठक को आमंत्रित किया गया है कि वे ऐसी रचनाएँ, समाचार, लेख, कविताएँ, कहानियाँ या ग़ज़लें पोर्टल पर भेजें, ताकि उनकी आवाज़ लोगों तक पहुँच सके। यह पोर्टल निःशुल्क है, और सभी रचनाओं का स्वागत किया जाता है, बशर्ते वे चोरी की न हों। इसे माध्यम बनाकर, ई-पत्रिका और डिजिटल समुदाय के जरिए सामाजिक और साहित्यिक योगदान को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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बेटियाँ

बेटियाँ घर की रौनक होती हैं चहकती, खिलखिलाती, और दिलों को जोड़ने वाली। बचपन से समझदार बनने तक, और विदाई के क्षण तक, वे अपनी यादें, प्यार और भावनाएँ एक संदुकची में समेटे चली जाती हैं।

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वरिष्ठ कवयित्री निवेदिता श्रीवास्तव ‘गार्गी’ को मिला विद्यावाचस्पति सम्मान

हरिद्वार में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में झारखंड की साहित्य साधिका को सम्मानित किया गया हरिद्वार, 12 जुलाई 2025 — साहित्यिक जगत के लिए यह गर्व का क्षण रहा जब झारखंड की वरिष्ठ कवयित्री निवेदिता श्रीवास्तव ‘गार्गी’ को विद्यावाचस्पति सम्मान से अलंकृत किया गया। यह सम्मान उन्हें हरिद्वार में आयोजित एक भव्य कवि सम्मेलन के…

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भरत जैन देश का सबसे अमीर भिखारी

मुंबई की सड़कों पर बैठने वाला एक साधारण सा भिखारी, जिसकी रोज की आमदनी ने उसे ७.५ करोड़ रुपये की संपत्ति का मालिक बना दिया. भारत जैन की कहानी सिर्फ चौंकाती नहीं, बल्कि शहरी भारत की अनकही सच्चाइयों का आईना भी दिखाती है. जहां समझदारी, बचत और धैर्य फुटपाथ से लेकर करोड़ों की संपत्ति तक का सफर तय कर देते हैं.

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बड़ी होटल : जब खबरें साँस लिया करती थीं

बड़ी होटल केवल एक होटल नहीं थी, बल्कि पूरे गाँव की धड़कन थी। वाल्व वाले रेडियो की गूंज में लोग अपने सुख-दुख, गर्व और शोक साझा करते थे। वहीं से देश-दुनिया की खबरें गाँव की गलियों में उतरती थीं और पोरवाल परिवार की सेवा-परंपरा ने इसे सच्चा सूचना केंद्र बना दिया।

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 सोच बदल गई

कभी-कभी हमारी भलाई की सोच भी सामने वाले के लिए बोझ बन जाती है. नीलम ने यह समझा कि उपहार की कीमत से ज़्यादा उसकी गरिमा और अपनापन मायने रखता है. सीमा के एक सधे हुए उत्तर ने नीलम की सोच बदल दी और यह सिखा दिया कि उपहार महँगा नहीं, बल्कि नया और सम्मानजनक होना चाहिए.

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