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मेरी नजरों में नेपाल — जैसा देखा, जैसा समझा

“अगर अलग मुद्रा की पहचान न होती, तो कभी न जान पाती कि किसी और ज़मीन पर हूँ!”
नेपाल—एक ऐसा देश, जहाँ हर गली, हर मोड़ पर आस्था की झलक है। साधारणता में भी गरिमा है, और गरीब कहलाने के बावजूद आत्मसम्मान की ऐसी मिसाल देखने को मिली जो अमीर देशों को भी सीख दे सके। महिलाएं व्यापार की कमान संभालती हैं, ईमानदारी हर चेहरे पर झलकती है, और हिंदी को जिस तरह से अपनाया गया है, वह दिल को छू जाता है। यह यात्रा केवल एक देश की नहीं, बल्कि आत्मिक अनुभव की रही।

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सेंट्रल रेलवे के जीएम ने किया होस्टल जयगढ़ का उद्घाटन

मध्य रेल्वे के महाव्यवस्थापक श्री धर्मवीर मीना ने मंगलवार को भायखळा स्थित सिग्नल और लिकॉम प्रशिक्षण संस्था का निरीक्षण किया और प्रशिक्षणार्थियों के लिए नवनिर्मित जयगढ़ वसतिगृह (छात्रावास) का उद्घाटन किया।

जयगढ़ छात्रावास में 36 सुसज्ज कक्ष हैं, जिनमें 144 प्रशिक्षणार्थियों के निवास की सुविधा है। इस भवन में व्यायामशाला, मनोरंजन कक्ष, भोजन कक्ष और वाई-फाई जैसी आधुनिक सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई गई हैं।

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अपने पुत्र को स्नेह और आशीर्वाद देती हुई भारतीय माँ का भावुक चित्र

कुलदीपक

“सुपुत्र” एक भावनात्मक हिंदी कविता है, जिसमें माँ अपने पुत्र को ईश्वर का वरदान, घर का उजियारा और अपने हृदय का अंश मानते हुए उसके प्रति अपना असीम प्रेम और आशीर्वाद व्यक्त करती है।

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माँ काली का करुणामय रूप, अपनी भक्त बेटी को आशीर्वाद देती हुई

मेरी प्यारी काली माँ

यह कविता माँ काली के साथ एक बेटी के गहरे आत्मीय रिश्ते को दर्शाती है, जहाँ देवी माँ कभी मित्र, कभी माँ, तो कभी मार्गदर्शक बनकर जीवन में शक्ति और सहारा देती हैं।

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1994 के एक भारतीय मोहल्ले की छत पर खड़ी एक किशोर लड़की हाथ में छोटी-सी चिट्ठी लिए शर्माते हुए सामने की छत पर खड़े एक लड़के की ओर देख रही है। दोनों छतों पर सूखते कपड़े, पानी की टंकी और दूरदर्शन के पुराने एंटीना दिखाई दे रहे हैं। ढलते सूरज की सुनहरी रोशनी पूरे दृश्य को मासूम पहली मोहब्बत और पुरानी यादों के भाव से भर रही है।

छत वाला प्रेम

सन् 1994 का वह दौर, जब प्रेम के पास न मोबाइल था, न सोशल मीडिया। बस शाम की छतें, तिरछी निगाहें, पत्थर में बंधी चिट्ठियाँ और एक अधूरी मोहब्बत, जो बरसों बाद भी यादों की छत पर जाड़े की धूप बनकर ठहरी रहती है।

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हटिया जन्माष्टमी पूजा समिति द्वारा भव्य काव्य महोत्सव

हटिया जन्माष्टमी पूजा समिति की ओर से हटिया रेलवे कॉलोनी स्थित डीआरएम ऑफिस के सामने बने पूजा पंडाल में छह दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसी क्रम में समिति द्वारा भव्य काव्य महोत्सव का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, सचिव चंदन यादव और वरीय अध्याय अध्यक्ष डॉ. रजनी शर्मा के संयोजन में आयोजित इस कवि सम्मेलन में सभी आमंत्रित अतिथियों को राधे नाम अंगवस्त्र, मोमेंटो एवं पुष्प पौधा प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. रजनी शर्मा ने मधुर स्वर में सरस्वती वंदना से किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री डॉ. सुरिंदर कौर नीलम ने की। उन्होंने अपनी रचना “जब मुरली बजी नटखट श्याम की, राधे-राधे हवाओं में होने लगी” प्रस्तुत कर माहौल को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।
इस अवसर पर सदानंद सिंह यादव ने देशभक्ति पर आधारित मुक्तक व सोहर गीत गाए, पुष्पा सहाय गिन्नी ने कृष्ण प्रेम और विरह की भावपूर्ण अभिव्यक्ति की, वहीं सचिन शर्मा ने हवाईन गिटार पर शिव भजन और गीतों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया

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धुंधले शहर की पृष्ठभूमि में अकेला शायर, न्याय के तराज़ू और बिखरे हुए मुखौटों का प्रतीकात्मक दृश्य

किसे गुनहगार कहें

“किसे गुनहगार कहें” एक समकालीन हिंदी ग़ज़ल है, जो समाज, न्याय व्यवस्था और नैतिक मूल्यों पर गहरी चोट करती है। हर शेर वर्तमान समय की विडंबनाओं को उजागर करता है, जहाँ सच और झूठ की सीमाएँ धुंधली होती दिखाई देती हैं। बाज़ारवाद, न्याय, आरोप और सफलता के बदलते अर्थों पर तीखा व्यंग्य करती यह ग़ज़ल पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है। सरल लेकिन प्रभावशाली भाषा में लिखी गई यह रचना आज के सामाजिक यथार्थ का सशक्त प्रतिबिंब है।

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मुंबई – रत्नागिरी के बीच 6 अतिरिक्त होली

होली के अवसर पर यात्रियों की सुविधा के लिए पनवेल–रत्नागिरी के बीच 6 अनारक्षित मेमू विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी. साथ ही दिवा–चिपलून स्पेशल की तिथियों में बदलाव किया गया है. रेलवे ने यात्रियों से संशोधित समय सारणी की जानकारी लेने की अपील की है.

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खूंटी पर टंगी संवेदना..

लोग घर की खूँटी पर टांग कर निकलते हैं संवेदना… और फिर उन्हें नहीं फर्क पड़ता सड़क किनारे हो रहे हादसों से उन्हें नहीं फर्क पड़ता की एक युवक बार बार घोप रहा है हाथ में लिये अपने औजार को किसी युवती पर जो तड़प रही है दर्द से… लोग एक दूसरे को देखते हैं…

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प्रकृति की पुकार

जिज्ञासा सिंह, (पर्यावरण प्रेमी, साहित्यकार एवं ब्लॉगर), लखनऊ आसमान को छू रहा, ऊँचा खड़ा विकास।पशु-पक्षी बेघर हुए, खोजें निज आवास।। प्लॉटिंग के बाज़ार में, बिकते चारागाह।घर-घर छुट्टा जानवर, व्यापारी की वाह।। उमड़-घुमड़ रोती रही, बदली नभ में आज।सर, सरिता और कूप के, बैरी करते राज।। मेढ़क प्यासा ढूँढ़ता, अपना खोया कूप।कंकड़-पत्थर हैं वहाँ, बदल गया…

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