पर्णकुटी और कोंगा सॉफ्टवेयर द्वारा महिलाओं को मिला स्वरोजगार
पर्णकुटी संस्था और कोंगा सॉफ्टवेयर प्रा. लि. की ओर से जरूरतमंद महिलाओं को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहयोग और सामग्री प्रदान की गई। इस उपक्रम के तहत कुल 10 महिलाओं को बिजनेस किट्स दी गईं। इनमें से तीन महिलाओं को सिलाई मशीनें, चार महिलाओं को एडवांस ब्यूटी पार्लर किट्स और तीन महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए कुल 32,500 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। यह कार्यक्रम सामाजिक दायित्व (CSR) के अंतर्गत स्वयंरोजगार और कौशल विकास अभियान** के रूप में आयोजित किया गया। इस अवसर पर अभिनेत्री तथा *अस्मिता महाराष्ट्राची* संस्था की संचालिका अंकिता शिवतारे और पर्णकुटी की सह-संस्थापक स्नेहा भारती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। उनके हाथों लाभार्थी महिलाओं को स्वरोजगार सामग्री वितरित की गई।
दादी की बिंदी…
गांव के फेरीवाले से सुर्ख लाल बिंदी खोजता दादा, दरअसल अपने प्रेम और सम्मान को जीवित रखना चाहता है। बहू की कठोरता के बीच दादी का स्वाभिमान और दादा का निश्छल प्रेम सामने आता है, जब वह स्वयं दादी के माथे पर बिंदी लगाता है—जैसे वर्षों बाद पूर्णिमा का चाँद खिल उठा हो।
‘सावन की सहेलियां’ में खूब बिखरीं तीज की छटा
पारीक समाज महिला मंडल, पुणे द्वारा सावन और तीज के पावन पर्व को बड़ी धूमधाम और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। “सावन की सहेलियाँ” नामक इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन खासतौर पर समाज की महिलाओं के लिए किया गया, जिसमें पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और नृत्य ने सभी को सावन के उल्लास में डुबो दिया।
वक्त की सुइयाँ
घड़ी की तीनों सुइयाँ जीवन के तीन मूल मंत्र सिखाती हैं. छोटी सुई धैर्य देती है, बड़ी सुई दिशा दिखाती है, और सेकंड की सुई हर पल की कीमत समझाती है। ये सुइयाँ रुकती नहीं, चाहे समय कैसा भी हो।हर टिक-टिक मानो याद दिलाती है.वक्त किसी का इंतज़ार नहीं करता, वह बस आगे बढ़ता रहता है।
बेटियों का दर्द
बेटियाँ अपने मन का दर्द बार-बार चीख़ कर कहना चाहती रहीं। उनकी मासूम आँखों से गिरते आँसू और थरथराती आवाज़ें उनके भीतर छिपी पीड़ा का सबूत थीं। पर अफ़सोस, इस दुनिया ने उन चीख़ों को कभी सुनना ही नहीं चाहा। उनके शब्द हवा में गूँजते रहे, मगर कानों तक पहुँचने से पहले ही जैसे दीवारों से टकराकर बिखर जाते। समाज की बेरुख़ी इतनी गहरी थी कि मानो किसी को कोई ख़बर ही न हो कि बेटियाँ टूट रही हैं, बिखर रही हैं और भीतर ही भीतर मर रही हैं।
सबसे बड़ा है कौन
सत्ता ,संगठन और राजनेता राजनीति की मुख्य धुरी हैं। कहा जाता है कि अगर इनमें तालमेल है तो सब कुछ ठीक नजर आता है मगर कभी कभी इनमें वर्चस्व की लड़ाई छिड़ जाती है और फिर यह तयः करना मुश्किल होता है कि इन तीनों में से कौन बड़ा है ,सर्वश्रेष्ठ है या किसकी चलती है या किसकी सुनी जा रही है। देखा जाए तो संगठन ही सबसे बड़ा होता है क्योंकि संगठन ही सबको जोड़कर रखता है और संगठन के नीचे ही सब काम करते हैं और संगठन ही निर्णय करता है कि कौन चुनाव लड़ेगा और जीतकर सत्ता में जायेगा और कौन संगठन में काम करेगा। संगठन ही तयः करता है कि कौन राजा बनेगा और कौन मंत्री । इसलिए संगठन और संगठन का मुखिया ही बड़ा होता है। संगठन से अलग होकर चुनाव लड़ने वाले चारों खाने चित ही दिखाई दिए हैं।