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"दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग और सोनम वांगचुक के अनशन का प्रतीकात्मक दृश्य।"

एक इस्तीफ़ा अगर हो भी जाता तो क्या होता

नीट 2026 प्रश्नपत्र लीक, शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग, सोनम वांगचुक के आमरण अनशन और सरकार के रुख के बहाने यह लेख लोकतंत्र, नैतिक जवाबदेही और जनआन्दोलनों की प्रासंगिकता पर गंभीर प्रश्न उठाता है। क्या जनता की आवाज़ सुनना सरकार की मजबूती का संकेत नहीं हो सकता?

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निर्लज्ज…

हर सुबह रिनी को वही काले-कलूटे अधेड़ की घूरती नज़रें तड़पा देती थीं। आज गुस्सा चरम पर था. बस पहुँचकर उसने राहत की साँस ही ली थी कि ड्राइवर बोला, “रघु भैया कह गए हैं, आप सीढ़ियाँ चढ़ जाएँ तभी बस स्टार्ट करना… अकेली रहती हैं, सुरक्षित नहीं है न।”सुनकर रिनी ठिठक गई“तो इसलिए वो मुझे घूरता था…”
ड्राइवर की अगली बात ने जैसे उसके भीतर कुछ तोड़ दियारघु अपनी बेटी की दर्दनाक मौत के बाद हर लड़की पर निगरानी रखता था।
पश्चाताप से भरी रिनी ने सीढ़ियाँ चढ़ते हुए पलटकर देखा बस धीरे से घरघराती हुई आगे बढ़ चुकी थी।

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पहली यादों और भावनाओं को दर्शाता भावुक दृश्य

पहली बात… जो हर पल आती है याद…

जीवन के हर पहले अनुभव ख़ुशी हो या पीड़ा हमारी स्मृतियों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। यह लेख उन्हीं अमिट यादों की भावनात्मक यात्रा है।

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खिड़की के पास शांत बैठी एक भारतीय महिला, चेहरे पर हल्की उदासी, पीछे धुंधला पारिवारिक माहौल और जिम्मेदारियों का प्रतीक दृश्य।

वो हँसती थी… अब चुप रहती है

“वो लड़की जो छोटी-छोटी बातों पर हँसती थी, धीरे-धीरे जिम्मेदारियों के बोझ तले चुप होना सीख गई।
यह सिर्फ एक स्त्री की कहानी नहीं, उन अनगिनत लड़कियों की सच्चाई है जो सबकी बनते-बनते खुद को कहीं पीछे छोड़ देती हैं।”

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Rescue team working to save a child trapped in a borewell in Ujjain while a distressed mother waits nearby

मां की आंखों के सामने गहराई में समा गया लाडला

17 घंटे से बोरवेल में फंसा दो साल का मासूम भागीरथ जिंदगी की जंग लड़ रहा है, जबकि बाहर उसकी मां की आंखें बेटे की एक आवाज के इंतजार में टिकी हैं. उज्जैन के बडनगर में चल रहे इस रेस्क्यू ऑपरेशन ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया है और हर कोई उसकी सलामती की दुआ कर रहा है.

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भक्ति, प्रेम और वैराग्य की दिव्य गंगा है श्रीमद् भागवत कथा

श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर भक्ति, प्रेम और वैराग्य का अनुपम संगम देखने को मिला। पूज्य श्री सुनीलकृष्ण जी व्यास ने गोपी गीत और राजा परीक्षित जन्म प्रसंग के माध्यम से निष्काम भक्ति और भगवान की करुणा का भावपूर्ण संदेश दिया। संपूर्ण वातावरण हरि नाम और भक्तिरस से सराबोर रहा।

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नई राहें, नया सफर

कविता एक नए आरंभ और सकारात्मक सोच का संदेश देती है। यह हमें प्रेरित करती है कि बीते हुए पलों और कठिन अनुभवों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ें। सूरज की नई किरण और आशा की नई रोशनी जीवन में नई संभावनाएँ लेकर आती है। हर अनुभव, चाहे खुशी हो या कठिनाई, हमें कुछ सिखाता है। संघर्षों से डरने की बजाय उन्हें अवसर के रूप में देखें। इच्छाशक्ति और हौसले के साथ, हम अपने जीवन की कहानी को नई शुरुआत के साथ लिख सकते हैं।

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रात के समय खिड़की के पास बैठा एक लेखक, कोरे काग़ज़ पर कलम से भावनाएँ लिखता हुआ

एहसासों का लावा…

लेखक केवल शब्द नहीं लिखता, वह अपने भीतर उमड़ते भावों को स्याही में घोलकर काग़ज़ पर उतारता है। कलम उसकी भावनाओं का वाहक बनती है और कोरा काग़ज़ अहसासों का सजीव संसार। यही लेखन श्रोताओं के दिल तक पहुँचकर अपनी अमिट छाप छोड़ देता है।

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सूर्योदय का शांत और ऊर्जा से भरा प्राकृतिक दृश्य

सूर्य वंदना

यह कविता प्रातःकालीन सूर्य की किरणों के माध्यम से प्रकृति के नवजीवन, ऊर्जा और जागृति का अत्यंत सुंदर चित्रण करती है। कवि ने मरीचि (सूर्य किरण) को समर्पित भावों के जरिए यह दर्शाया है कि किस प्रकार हर सुबह नई आशा, नई चेतना और सकारात्मकता लेकर आती है।

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मन का डेमेंशिया

सोचो, हम क्या दे सकते हैं किसीको, बिना सोचे समझे। जीवन अस्थाई है, फिर भी हम उम्मीदों से जुड़े रहते हैं। स्वप्न, हादसे, बीमारियाँ, खुशी, दुख — सब चला जाता है, बस स्मृतियाँ रह जाती हैं। ये स्मृतियाँ अक्सर दूसरों के लिए शेष रहती हैं, हमारे लिए नहीं। डेमेंशिया जैसी बीमारी याददाश्त और भावनाओं को बदल देती है, हमें नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ती है और प्रेम की ऊर्जा को कमजोर कर देती है। इसलिए बेहतर है कि हम दूसरों को उनके जैसे ही छोड़ दें, स्वयं के विचारों को बदलें और अपना बेस्ट दें ताकि हमारी स्मृतियाँ दूसरों के लिए यादगार बनें।

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