फूलों की गुफ़्तगू…

फूलों की महक में जैसे कोई नर्म-सा सवाल छुपा था। हम रुके तो उन्होंने आहिस्ता से गुफ़्तगू शुरू कर दी। हमने भी दिल का हाल कह दिया. वो बातें, जो बरसों से किसी को न बताई थीं। अजीब ये हुआ कि हमारी हर बात पर फूल और भी महकने लगे, मानो मोहब्बत ने उन्हें भी अपनी गिरफ़्त में ले लिया हो। अब बाग़ की हर कली यूँ मुस्कुराती है, जैसे हमारी रूह से उनका कोई पुराना नाता हो।

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ज्ञान परंपरा और भूगोल पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में “भारतीय ज्ञान परंपरा के विशेष संदर्भ में भूगोल विषय” पर केन्द्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर कुलगुरु प्रोफेसर अर्पण भारद्वाज के निर्देशन में कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में भूगोल विषय के पाठ्यक्रम निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा को समाहित करना है।

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मुंबई में आयोजित हुआ ‘केवल काव्य परिवार’ का भव्य काव्य संध्या समारोह

चेन्नई से पधारे कवि-उद्योगपति केवल कोठारी के सम्मान में हुआ आयोजन नवी मुंबई, 14 जून साहित्यिक प्रेमियों के लिए शनिवार की शाम खास रही, जब सेक्टर-21, खारघर में आयोजित हुई एक भावपूर्ण और भव्य काव्य संध्या। यह आयोजन “केवल काव्य परिवार” के संस्थापक, चेन्नई से पधारे उद्योगपति व कवि श्री केवल कोठारी के मुंबई आगमन…

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उज्जैन में पुलिस द्वारा 3 किलो डोडाचूरा के साथ पकड़ा गया तस्कर और जब्त बाइक

मंदसौर से उज्जैन तक डोडाचूरा तस्करी का नेटवर्क उजागर

एक साधारण डिलेवरी का इंतजार कर रहा युवक पुलिस के लिए बड़े खुलासे की कड़ी बन गया. बड़नगर पुलिस ने 3.125 किलो डोडाचूरा के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया है, जिससे अब पूरे नेटवर्क के खुलासे की उम्मीद बढ़ गई है.

पुलिस के अनुसार आरोपी मौलाना ब्रिज के पास ग्राहक का इंतजार कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई. भागने की कोशिश के बावजूद घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया.

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प्रेमपत्र से वंचित लेखक

यह लेख एक हास्य-व्यंग्य शैली में लिखा गया आत्मकथन है, जिसमें लेखक अपनी असफलता का कारण मज़ाकिया अंदाज़ में पत्नी को ठहराते हैं। वह बताते हैं कि जवानी में यदि पत्नी ने उनके प्रस्ताव पर तुरंत “हाँ” न कहा होता, तो उनके भीतर “दिल टूट रस”, “बेचारा रस” और “मजनूं रस” उमड़ते और वे शायरी, कविताएँ व लेखों के माध्यम से एक बड़े लेखक बन जाते। मगर पत्नी ने उन्हें प्रेम-पत्र लिखने या भावुक कविताओं में ढलने का कोई अवसर ही नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि लेखक के भीतर मौजूद सारे “रस” वातावरण के अभाव में बाहर ही नहीं निकल पाए। लेख हल्के-फुल्के हास्य, नोकझोंक और आत्मव्यंग्य के माध्यम से यह संदेश देता है कि जीवन की दिशा और रचनात्मकता अक्सर निजी परिस्थितियों और रिश्तों से प्रभावित होती है।

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सड़क पर अपमानित खड़ी एक रोती हुई युवती, पृष्ठभूमि में धुंधला शहर और भावुक माहौल

मोहब्बत एक ज़हर

“मोहब्बत एक ज़हर” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो प्रेम में अपमान, सामाजिक भय, और माता-पिता के सम्मान के बोझ तले टूटती एक बेटी की पीड़ा को दर्शाती है। यह कविता युवा भावनाओं, पछतावे और परिवार की प्रतिष्ठा के संघर्ष को संवेदनशील शब्दों में अभिव्यक्त करती है।

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एक साल के बच्चे ने खेल-खेल में कोबरा को काटा

बिहार के बेतिया में एक साल के मासूम ने खेल-खेल में कोबरा को काट डाला। सांप की मौत हो गई, लेकिन बच्चा सुरक्षित है और इलाज के बाद खतरे से बाहर बताया जा रहा है।

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सिंहस्थ 2028: उज्जैन में माइक्रो-लेवल प्लानिंग

उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ माइक्रो-लेवल प्लानिंग के साथ तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। 4 नवंबर 2025 को मीडिया संवाद सत्र में पत्रकारों ने प्रोजेक्ट्स की गति देखकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सराहना की। संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन सिंह ने शिप्रा जल संरक्षण और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रमुख कार्यों की प्रेज़ेंटेशन दी।
₹614.3 करोड़ का सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट शिप्रा को सालभर प्रवाहमान रखने की तैयारी में है और 2027 मानसून तक इसका परीक्षण प्रस्तावित है। वहीं ₹919 करोड़ की कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट योजना शिप्रा में गंदा पानी मिलने को पूरी तरह रोक देगी। सिंहस्थ के लिए 29 किमी घाट, नया फोरलेन MR-22 और 19 नए पुल तेजी से बन रहे हैं।

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भरोसे की जिंदगी

भरोसा जीवन की वह डोर है, जो हमें स्वयं से लेकर दूसरों और अंततः ईश्वर तक जोड़ती है। विपरीत परिस्थितियों में जब अपने प्रयास नाकाफी पड़ जाएँ, तब किसी अपरिचित का बढ़ा हुआ हाथ ईश्वर जैसा लगता है। जीवन की यह राह आपसी विश्वास पर ही चलती है और अंत में भरोसा यही कहता है, “जो भी होगा, अच्छा ही होगा।”

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घर छोटे हुए, लेकिन संस्थाएँ बड़ी क्यों?

आज के समय में संयुक्त परिवार तेजी से बिखर रहे हैं और लोग अलग-अलग रहना पसंद कर रहे हैं। नौकरी, शहर बदलना या बड़े परिवार की मजबूरी जैसी वजहें तो सामान्य हैं, लेकिन सबसे गंभीर बात यह है कि एक ही घर में रहते हुए भी लोग अपने-अपने चूल्हे अलग कर लेते हैं। दूसरी ओर, महिलाएँ समाज में नई-नई संस्थाएँ सफलतापूर्वक चला रही हैं, फिर सवाल उठता है—जब महिलाएँ बड़े संगठन संभाल सकती हैं तो परिवार को क्यों नहीं जोड़े रख पा रहीं?

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