बाल दिवस पर बचपन के रंगों, संस्कारों और संवेदनाओं से सजी काव्य-सरिता

प्रसिद्ध लेखिका डॉ. अनुराधा पाडेय की लाइव वॉयर न्यूज के लिए रिपोर्ट
लखनऊ.
महिला काव्य मंच (मध्य) की लखनऊ इकाई द्वारा 14 नवम्बर 2025 को ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया. कार्यक्रम बाल दिवस के उपलक्ष्य में समर्पित रहा, जिसमें बचपन, मासूमियत, संस्कार, स्मृतियों और जीवन मूल्यों पर आधारित अनेक भावपूर्ण व विविध विधाओं की रचनाएँ प्रस्तुत की गईं. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. ऊषा चौधरी, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश मध्य (मकाम) तथा विशिष्ट अतिथि नोरिन शर्मा, सचिव पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मकाम) रहीं. गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. राजेश कुमारी (राष्ट्रीय अध्यक्षशिक्षा मंच एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मकाम ने की.
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. राजेश कुमारी ने मकाम के प्रमुख उद्देश्यों और गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि तथा सभी कवयित्रियों का हार्दिक स्वागत किया. उन्होंने बाल दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ङ्गङ्घबचपन केवल स्मृति नहीं, संस्कारों और भविष्य की आधारशिला है.

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. रीना श्रीवास्तव, अध्यक्ष महिला काव्य मंच लखनऊ इकाई ने भगवद्-वंदना के साथ किया. उन्होंने ही पूरे कार्यक्रम का सुचारु संचालन भी किया.एक से बढ़कर एक रचनाओं ने गोष्ठी को स्मरणीय बना दिया. गोष्ठी में डॉ. नीरजा शुक्ला नीरू भावपूर्ण ईश वंदना, डॉ. सरिता कटियार (अंखियों में ही..), पूजा श्रीवास्तव (जो उजाला में..), गीता खत्री (कुछ अपने बचपन..), डॉ. राजेश कुमारी (चिड़िया जैसी..), डॉ. कीर्ति श्रीवास्तव (यह बच्चे बहुत..), डॉ. गीता मिश्रा (बहुत याद आता..), अंजू सुंदर (लौट आते वो बचपन..), मनीषा श्रीवास्तव (है बाल दिवस..), डॉ. साधना मिश्रा (ज़िंदगी का सबसे..), संध्या श्रीवास्तव (देख के आज…), डॉ. अलका गुप्ता (बाल दिवस के मंगल..), डॉ. उषा चौधरी (मुख्य अतिथि) (तू सूरज बन के..), डॉ. छाया त्यागी (झूला गुड़िया..), नीलम श्रीवास्तव (बिटिया का ठुमक..), डॉ. सुधा मिश्रा (विलंबित वचन..), डॉ. शोभा वाजपेई (नन्हा चूहा..), डॉ. पूनम सिंह (याद आ गया..), डॉ. रेखा गुप्ता (आओ बच्चों..), बीना श्रीवास्तव (दस्तक देती..), डॉ. रीना श्रीवास्तव (चलो एक बार..), डॉ. अनुराधा पांडेय (हम भी शहंशाह थे…) की प्रस्तुतियां दीं.
गोष्ठी के अंत में विशिष्ट अतिथि नोरिन शर्मा ने बचपन पर अपनी हृदयस्पर्शी पंक्तियों के साथ प्रस्तुति देकर माहौल को भावपूर्ण बना दिया. उन्होंने सभी कवयित्रियों को उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक प्रस्तुति के लिए बधाई दी और कहा कि बचपन हमारी स्मृतियों का अमर अध्याय है, जो जीवन के हर मोड़ पर सहजता और सरलता का संदेश देता है. कार्यक्रम का समापन संचालिका डॉ. रीना श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि तथा समस्त कवयित्रियों का धन्यवाद करते हुए गोष्ठी का समापन प्रसिद्ध प्रार्थना पंक्तियों
सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाःके मंगल संदेश के साथ किया.यह ऑनलाइन काव्य महोत्सव भाव, रचनात्मकता और साहित्यिक सौंदर्य का जीवंत उदाहरण रहा, जिसने बाल दिवस को सार्थकता और संवेदना के साथ मनाया.
सम्पादक जी का बहुत बहुत आभार 💐
बेहतरीन प्रकाशन।
बल दिवस के उपलक्ष में महिला काव्य मंच द्वारा बहुत सुंदर गोष्ठी का आयोजन किया गया।👌
Thank you so much editor sir for excellent work
आदरणीय संपादक जी काव्य संगोष्ठी की विज्ञप्ति प्रकाशित करने के लिए हार्दिक धन्यवाद
बहुत सुंदर प्रकाशन। आभार।
महिला काव्य मंच *बाल दिवस* स्पेशल संगोष्ठी की विज्ञप्ति प्रकाशित करने हेतु बहुत -बहुत धन्यवाद।
बहुत बहुत धन्यवाद…गोष्ठी का आयोजन, संचालन शानदार रहा… ढेर सारी बधाइयां
बहुत सुंदर अभिव्यक्तियों से बचपन सा लुभावना बन गया बाल दिवस, सभी विद्वतजनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 💐🙏